परफ्यूम के तीन भाग होते हैं, जिन्हें आमतौर पर नोट्स के रूप में जाना जाता है। हर नोट पर अलग तरह की खुशबू है। टॉप नोट से किसी परफ्यूम की पहली छाप पड़ती है। ये जल्दी ही वाष्पित हो जाते हैं और आमतौर पर इनकी महक महज 15 मिनट तक रहती है। इस लिहाज से इन्हें बेहतर होना चाहिए।
आमतौर पर इसमें साइट्रस का इस्तेमाल होता है। मिडिल नोट थोड़ा ज्यादा टिकता है और इसकी महक अमूमन एक घंटे तक रहती है। इस नोट में आमतौर पर पुष्प-संबंधी इत्र का इस्तेमाल होता है। इसके बाद आता है बेस नोट, जिसमें इस तरह के इत्र होते हैं जिनकी खुशबू कई घंटों तक बनी रहती है। आमतौर पर इसमें चंदन और इस जैसी चीजों से बने इत्र का इस्तेमाल होता है।
इंसानी व्यवहार भी परफ्यूम के इन तीन नोट्स के समान है। इंसान किसी काम के शुरुआती दिनों में अपनी सर्वश्रेष्ठ क्षमताओं के हिसाब से काम करता है, जबकि दो-तीन हफ्ते बाद वह इसी काम को कुछ और ही तरीके से करने लगता है। लेकिन चयनित व्यक्ति की काम के हिसाब से योग्यता की अच्छी तरह जांच-परख करने में एक-दो महीने लग सकते हैं।
याद रखें हर इंसान कहीं न कहीं उपयोगी होता है। सबकी अपनी प्रतिभा होती है। वर्ष 1983 में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में एजुकेशन के प्रोफेसर डॉ. होवार्ड गार्डनर ने बहुमुखी प्रतिभा का सिद्धांत प्रतिपादित किया था। यह सिद्धांत कहता है कि प्रतिभा का पारंपरिक विचार, जो आईक्यू परीक्षण पर आधारित है, बहुत ही सीमित है।
इसके बजाय डॉ. गार्डनर ने बच्चों और वयस्कों की मानवीय क्षमता की व्यापक रेंज के लिए जिम्मेदार आठ अलग-अलग प्रतिभाओं को प्रस्तावित किया है। ये प्रतिभाएं हैं - भाषायी प्रतिभा (वर्ड स्मार्ट), तार्किक-गणितीय प्रतिभा (नंबर/रीजनिंग स्मार्ट) , स्थानिक प्रतिभा (पिक्चर स्मार्ट) , कायिक-गतिज-स्थैतिक प्रतिभा (बॉडी स्मार्ट) , संगीत प्रतिभा (म्यूजिक स्मार्ट) , अंतर्वैयक्तिक प्रतिभा (पीपुल स्मार्ट) , अंत:वैयक्तिक प्रतिभा (सेल्फ स्मार्ट) , प्रकृतिवादी प्रतिभा (नेचर स्मार्ट)
डॉ. गार्डनर का कहना है कि हमारे स्कूलों और संस्कृतियों का ज्यादातर जोर इंसान की भाषायी और तार्किक-गणितीय प्रतिभा पर होता है।
हम अपनी संस्कृति में तार्किक और स्पष्ट सोच रखने वाले इंसानों का आदर करते हैं। हालांकि डॉ. गार्डनर कहते हैं कि हमें ऐसे लोगों पर भी उतना ही ध्यान देना चाहिए, जिनमें दूसरी तरह की प्रतिभाएं होती हैं। मसलन हमें नहीं भूलना चाहिए कि कलाकार, वास्तुशिल्पी, संगीतज्ञ, प्रकृतिवादी, डिजाइनर्स, नर्तक, थेरेपिस्ट, उद्यमी और इस तरह के अन्य गुणवान लोग भी हैं, जो हमारी इस दुनिया को समृद्ध बनाते हैं।
फंडा यह है कि..
हम इंसान की प्रतिभा की समुचित पहचान कर उसे ऐसे क्षेत्र में नियोजित करें जो एक सफल और स्थायी कारोबारी माहौल के लिहाज से जरूरी है।