अनुभव सिन्हा की सुपरहीरो पटकथा पर शाहरुख खान ‘रा 1’ नामक फिल्म बनाने जा रहे हैं और वह अगले चार महीनों तक इसकी शूटिंग में व्यस्त रहेंगे। फरहा खान की पटकथा ‘हैप्पी न्यू ईयर’ में अभी बहुत काम बाकी है, अत: इसकी शूटिंग बाद में शुरू होगी। ज्ञातव्य है कि अनुभव सिन्हा ने म्यूजिक वीडियो बनाने के बाद टी-सीरीज के लिए एक फिल्म ‘तुम बिन’ बनाई थी।
बाद में उनकी ‘तथास्तु’ और ‘कैश’ जैसी फिल्में असफल रहीं, जबकि फरहा की विगत दोनों फिल्मों ने शाहरुख खान को बहुत धन दिलाया। स्पष्ट है कि अनुभव सिन्हा की यह पटकथा शाहरुख खान को बहुत पसंद है।
शाहरुख खान के विशेष प्रभाव वाले स्टूडियो में आधुनिकतम उपकरण आयात किए गए हैं और दक्षिण के सफलतम निर्देशक शंकर की ‘रोबोट’ भी केवल इसलिए निरस्त हुई कि शंकर स्पेशल इफेक्ट के दृश्य चेन्नई में करना चाहते थे और शाहरुख खान फिल्म का निर्माण अपने स्टूडियो की गुणवत्ता के शोकेस के रूप में करना चाहते थे। शंकर अपनी सुपरहीरो फिल्म ‘रोबोट’ रजनीकांत और ऐश्वर्या राय के साथ बना रहे हैं।इसी घटना के बाद शाहरुख ने अपेक्षाकृत कम सफल अनुभव सिन्हा के साथ ‘रा 1’ प्रारंभ करने का निश्चय किया था। उनके इस निर्णय के पीछे यह कारण भी हो सकता है कि उनके बच्चे उन्हें सुपरमैन की तरह देखना चाहते हैं। इस फिल्म में वह धरती की सुरक्षा की खातिर आकाश में उड़ेंगे और एकल व्यक्ति सेना की तरह खलनायकों को नष्ट करेंगे। शाहरुख को यह भी जानकारी है कि बच्चों की पसंद की फिल्में जबरदस्त धंधा करती हैं।
इन कारणों के अतिरिक्त एक कारण यह भी हो सकता है कि सुपर सितारे के रूप में दिन-रात चहुंओर प्रशंसित होने के कारण वे स्वयं को सुपरमैन समझने लगे हैं। उनकी सफलता की कथा सचमुच में फंतासी लगती है। जब वह सोते हैं, तब भी उनकी पूंजी से खड़े उद्योग उनके लिए धन कमा रहे होते हैं।
लंदन के श्रेष्ठि वर्ग के मोहल्ले में उनकी बहुमंजिला इमारत में केवल एक मंजिल उनके उपयोग के लिए है और शेष किराए पर दे रखी हैं। सफलता की इस सावन-भादौ में अपना संतुलन बनाए रखना कठिन है। आज के दौर में लोग सितारों के चरणों में बिछे जाते हैं। सितारों को पागल बना देने के सारे साजो-सामान तैयार हैं।
सिनेमा की टेक्नोलॉजी के विकसित होने के साथ ही सुपरहीरो की फिल्में ज्यादा बजट के साथ बनने लगीं। इसी के साथ डरावनी भुतहा फिल्मों की भी बाढ़ आ गई। अमेरिका में अंतरिक्ष फिल्मों के दौर ने बहुत मुनाफा कमाया। इस धारा ने आम आदमी को नायक बनाकर पेश करने वाली मानवीय फिल्मों के प्रवाह को लगभग रोक दिया।
शाहरुख का समय बोध कुछ ऐसा है कि वर्तमान के हर क्षण मंे उन्हें अहसास होता है कि वे इतिहास गढ़ रहे हैं और भविष्य के लिए धरोहर बना रहे हैं। उन्होंने अपनी अभिनीत दूसरे निर्माताओं की फिल्मों के अधिकार भी खरीदने की पहल की है। उनके इस अहसास को हम मुगालता भी समझ सकते हैं, क्योंकि उनसे बेहतर कहने वाले उनके पहले भी आए हैं और बाद में भी आएंगे।
इतिहास के निर्मम चक्र को नहीं समझ पाने और स्वयं के मूल्यांकन दोष के कारण ही मायावती अपनी मूर्तियां लगा रही हैं। शाहरुख फिल्में खरीद रहे हैं और सुपरमैन बनकर आकाश में इबारत लिखना चाहते हैं। बेचारा आम आदमी तो बाकी इतिहास है, समय की शतरंज पर प्यादा है।