भोपाल. मंत्रिमंडल विस्तार के बाद ‘लालबत्ती’ पाने से वंचित रहे विधायकों और उनके समर्थकों के तेवर तीखे हो गए हैं। एक विधायक ने तो यहां तक कह दिया कि दागी मंत्रियों का लौटना भ्रष्टाचार के लाइसेंस का नवीनीकरण है। रीवा में कार्यकर्ताओं ने मंत्री पद के लिए लेन-देन तक के आरोप लगाए।
गॉड फादर नहीं तो प्रदेश में आगे बढ़ना मुश्किल
शिवराज सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में शपथ से वंचित मंत्री पद के दावेदार भाजपा नेताओं में नाराजगी की हद तक मायूसी है। दिल्ली के दबाव उन्हें रास नहीं आ रहे। अंतिम समय तक संभावित मंत्रियों की कतार में रहे एक विधायक का कहना है कि यह साबित हो गया है कि जिनका दिल्ली में कोई गॉडफादर नहीं है, उनका यहां आगे बढ़ना मुश्किल है। रीवा में तो नाराज कार्यकर्ताओं का गुस्सा सड़कों पर उतर आया।
बुंदेलखंड क्षेत्र के एक पूर्व मंत्री का कहना है कि भाजपा में सत्ता और संगठन की दिल्ली पर निर्भरता बढ़ रही है। हर अहम फैसले दिल्ली की हरी झंडी के बाद होने लगे हैं। संगठन के लिए इसके परिणाम घातक होंगे। अपना नाम न छापने की शर्त पर दैनिक भास्कर से चर्चा में उन्होंने स्वीकार किया कि प्रदेश स्तर पर तमाम आश्वासन के बावजूद उनका नाम अंतिम समय में इसलिए कट गया क्योंकि दिल्ली में उनका कोई गॉड फादर नहीं था।
हमने जमीनी कार्यकर्ता के रूप में काम किया और जब, जहां आदेश हुआ, वहां लगे। यही समय दिल्ली की जमावट में लगाया जाता तो उन्हें यह दिन देखने नहीं पड़ते। एक वरिष्ठ विधायक ने कहा कि दिल्ली के अनुमोदन पर दागी मंत्रियों को लेकर सरकार ने भ्रष्टाचार के लाइसेंस का नवीनीकरण कर दिया है।
कांग्रेस को मुद्दा दे दिया
सीधी के विधायक केदार शुक्ला का नाम भी मंगलवार रात तक विचारणीय रहा, लेकिन बुधवार को उन्हें शपथ का शुभ समाचार नहीं मिला। भोपाल आए उनके समर्थकों को मायूस होकर लौटना पड़ा। उन्होंने अपनी नाराजगी इन शब्दों में जाहिर की-‘विंध्य की उपेक्षा हुई है और यह स्पष्ट है कि यह इलाका भोपाल का उपनिवेश भर बनकर रह गया है।’
एक अन्य वरिष्ठ विधायक का कहना है कि दिल्ली से दबाव बनाकर मंत्रिमंडल का विस्तार जिस ढंग से हुआ है, उसने बैठे-ठाले कांग्रेस को एक मुद्दा थमा दिया है। इसीलिए पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजयसिंह ने गैंग शब्द का प्रयोग किया। अब स्थानीय निकायों के चुनावों में भाजपा को दिल्ली का दबाव भारी पड़ेगा। कोलारस के विधायक देवेंद्र जैन कहते हैं कि केंद्रीय नेताओं और प्रदेश के वरिष्ठ पार्टी नेताओं को जो उचित लगा, वही निर्णय लिया गया। बड़े नेताओं के फैसले उचित हैं, कुछ कहना ठीक नहीं है।
दांत दिखाने के और खाने के और
पूर्व मंत्री मीना सिंह ने कहा कि महिला विधायकों की कमी नहीं थी। लेकिन कोई योग्य नहीं मिला, यह आश्चर्य की बात है। क्या सोचकर महिलाओं को दूर रखा गया, कहना कठिन है। निश्चित ही इसकी प्रतिक्रिया आने वाले समय में कहीं न कहीं देखने को मिलेगी।
किसी को योग्य नहीं समझा
पूर्व मंत्री कुसुम महदेले का कहना है कि कई योग्य महिला विधायकों के बावजूद किसी को मंत्री बनाने लायक नहीं समझा गया, जबकि नीता पटेरिया, मीना सिंह, प्रतिभासिंह और ललिता यादव जैसी विधायक अनुभवी और योग्य हैं। भाजपा के संविधान के मुताबिक तो 30 फीसदी स्थानों पर महिलाओं को होना चाहिए था।
रीवा में तोड़फोड़, हंगामा व इस्तीफे
नाराज पार्टी कार्यकर्ताओं का गुस्सा यहां सड़कों पर उतर आया। सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने पार्टी कार्यालय में तोड़फोड़ की और मुख्यमंत्री के खिलाफ जमकर नारे लगाए। कार्यकर्ताओं ने दागी मंत्रियों को हटाने की मांग के साथ मंत्री पद के लिए पैसे के लेन-देन के आरोप भी जड़े। तीन जनपद अध्यक्ष, बीस सदस्यों समेत करीब सौ से ज्यादा सरपंचों ने जिला अध्यक्ष कमलेश्वर सिंह को इस्तीफे सौंप दिए।
इन नाराज कार्यकर्ताओं में सबसे ज्यादा गुढ़ क्षेत्र के थे, जहां से नागेंद्रसिंह विधायक हैं। श्री सिंह ने भास्कर से चर्चा में कहा कि संभव है कुछ कार्यकर्ताओं को मंत्रिमंडल विस्तार से समस्या हो। यह उनकी स्वाभाविक प्रतिक्रिया होगी, लेकिन अपने स्तर पर उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं से शांत और अनुशासन में रहने की अपील करते हुए समझाइश दी है। उन्होंने कहा कि मंत्री बनाना या नहीं बनाना मुख्यमंत्री और पार्टी के बड़े नेताओं के अधिकार की बात है। इसमें नाराज होने की गुंजाइश नहीं है। इसलिए विरोध प्रदर्शन अनुचित है।
नहीं बँटे विभाग
मंत्रियों के विभागों पर खींचतान मची है। इसके चलते शपथ के दूसरे दिन भी विभागों को लेकर कोई फैसला नहीं हो पाया। गुरुवार को दिनभर राजनीतिक एवं प्रशासनिक हलकों में कयास लगाए जाते रहे। राजभवन, मंत्रालय और मुख्यमंत्री निवास पर रात दस बजे तक अधिकारी विभागों की सूची का इंतजार करते रहे। एक प्रवक्ता का कहना है अब शुक्रवार को ही विभाग वितरण की संभावना है।
किसको क्या मिला? यही सवाल पूरे प्रदेश में दिन भर गूंजता रहा। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव एवं प्रदेश प्रभारी अनंत कुमार राजधानी में ही थे और सुबह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जहांनुमा होटल में उनसे मुलाकात की। सूत्रों के अनुसार विभागों के वितरण पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं व मुख्यमंत्री के बीच चर्चाओं का दौर भी चलता रहा।
सीएम निवास पर मुख्यमंत्री एवं प्रदेश अध्यक्ष नरेंद्रसिंह तोमर के बीच गुरूवार रात एक बार फिर विभागों पर बातचीत हुई। लगातार चली चर्चाओं के बारे में बताया जाता है कि विभागों के मुद्दे पर पार्टी की आंतरिक राजनीति गरमाई हुई है। शपथ के तुरंत बाद भी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच कई दौर की बातचीत हुई। इसके बाद भी कोई सहमति नहीं बन पाई। कुछ केबिनेट मंत्रियों के दबाव के चलते विभागों का वितरण एक दिन और टल गया है।
मंत्रियों के विभागों के वितरण को राजनीतिक एवं प्रशासनिक गलियारों में विभिन्न प्रकार की चर्चाएं होती रही। सूत्रों के अनुसार मंत्रियों के विभागों में फेरबदल किए जाने की भी चर्चाएं हैं। शिवराज सरकार के कुछ कैबिनेट मंत्रियों ने विभागों में परिवर्तन का मुख्यमंत्री से आग्रह किया है। मुख्यमंत्री दोपहर 12 बजे मंत्रालय आ गए थे। सूत्रों ने बताया कि मंत्रियों की अनौपचारिक बैठक के लिए सूचनाएं जारी हो र्गई थीं।
तब लगा कि विभागों का वितरण होने वाला है। लेकिन अचानक यह बैठक स्थगित हो गई। इसके बाद देर रात तक सिर्फ चर्चाएं ही चलती रहीं। मंत्रिमंडल के नवनियुक्त सदस्य भी अपनी जिम्मेदारियों के बारे में जानने के लिए सक्रिय रहे। केबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय अजय विश्नोई व करणसिंह वर्मा ने मंत्रालय में मुख्यमंत्री से मुलाकात भी की।
पसंदीदा विभाग पर अड़े
पार्टी सूत्रों के अनुसार कुछ केबिनेट मंत्री अपने विभागों को बदलने के लिए अड़ गए हैं। विभाग वितरण में हो रहे विलंब के पीछे भी यही वजह बताई जा रही है। केबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय व अनूप मिश्रा की मंशा अपने पुराने विभाग लेने की है। वहीं दूसरी ओर संगठन की इच्छा है कि केबिनेट जयंत मलैया का विभाग भी बदल दिया जाए। श्री मलैया भोपाल मास्टर प्लान को लेकर काफी विवादों में आ गए है।
सूत्रों के मुताबिक मंत्रिमंडल में अपनी जगह बनाने में कामयाब हुए पुराने मंत्रियों की चाहत भी अपने पसंदीदा विभागों को लेने की है। लेकिन मुख्यमंत्री की मंशा इसके विपरीत है। मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर पार्टी में हो रहे आंतरिक विरोध के मद्देनजर भी विभाग वितरण में विलंब की अटकलें हैं।
शपथ लेने से चूके मरावी एक दिन बाद बने राज्यमंत्री राज्यपाल रामेश्वर ठाकुर ने गुरुवार शाम राजभवन में भाजपा विधायक जयसिंह मरावी को राज्यमंत्री के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। श्री मरावी को बुधवार को ही विस्तार के दौरान शपथ ग्रहण करना थी लेकिन वे निर्धारित समय पर भोपाल नहीं पहुंच पाए थे।
महिलाओं की उपेक्षा क्यों?
शिवराजसिंह की पहचान भैया और मामा के रूप में भी है लेकिन जब अवसर देने का मौका आता है तो महिलाओं के लिए कंजूसी दिखाई जाती है।
कुसुम मेहदले, पूर्व मंत्री
एक तरफ पार्टी महिला सशक्तिकरण की बात करती है, निकायों में 50 फीसदी आरक्षण की पहल करती है तो दूसरी तरफ यह रवैया समझ से परे है।
मीना सिंह, पूर्व मंत्री