चंडीगढ़। बुधवार को विधानसभा के पहले सत्र का समापन हो गया। वाद-विवाद, रागद्वेष के बीच इस सत्र में विशेष बात यह उभरी कि दोनों पक्षों के नेता सदन को गरिमापूर्ण ढंग से चलाना चाहते हैं, अध्यक्ष चुनने के बाद कई तजुर्बेकार विधायकों ने इस बात पर जोर दिया। कइयों ने उपाय सुझाया कि नए विधायकों को सदन के बारे में क्लास लगा शिक्षित किया जाए, थोड़ी देर बाद कई पुराने विधायक सदन की गरिमा पर प्रहार करते नजर आए वरिष्ठ विधायक संपत सिंह ने इस बात की शुरुआत की।
उन्होंने कहा, सदन की कार्यवाही पूरा देश देखता है, आमतौर पर राजनेताओं के प्रति धारणा अच्छी नहीं होती। ऐसे में नए सदस्यों को शिक्षित करना चाहिए। वरिष्ठ विधायकों को सदन के बारे में बताएं। सदन में भाषा व कंट्रोल व संयम जरूरी है। मौका मिलने पर ही अपनी बात कहें। बीच में टीका-टिप्पणी को खत्म किया जाना चाहिए।
वरिष्ठ नेता कुलदीप शर्मा, राव दान सिंह, अजय सिंह यादव,गीता भुक्कल सहित कई विधायकों ने इस बात का समर्थन किया। बाद में स्थिति विपरीत होती चली गई। सदन में कई बार ऐसी नौबत आई जब कई दलों के कई वरिष्ठ विधायकों की असंसदीय भाषा को कार्यवाही से निकालने के लिए कहा गया। तू-तड़ाक, दोगला नेता, बेहुदा जैसे कई शब्दों को प्रयोग हुआ,चुप रह, बैठ जा जैसे शब्द भी सुनाई दिए। महिला विधायक अनिता यादव ने अपने मन की बात में महिलाओं का सदन में सम्मान रखने की अध्यक्ष से गुजारिश की।
शायद उन्हें सम्मान न रहने का भय रहा होगा। भाजपा के विधायक कृष्णपाल गुर्जर को समान व्यवहार की उम्मीद नहीं है, इसलिए उन्होंने यह कहा कि भाजपा के विधायक कम हैं, इसलिए कहीं ऐसा न हो कि उन्हें बोलने का मौका कम दिया जाए। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि नए विधायकों ने पहले दिन कई वरिष्ठ विधायकों को जो रुख देखा, अगली बार उसी के आधार पर तैयारी करेंगे या नहीं? जब वरिष्ठ विधायक असंसदीय भाषा का प्रयोग कर रहे हैं तो नए विधायकों को क्या सिखाएंगे। वैसे सदन में अध्यक्ष हरमोहिन्दर सिंह चट्ठा के कार्यवाही चलाने के तरीके ने संकेत दिए हैं कि वे गरिमा में नहीं रहने वाले विधायकों को सदन की भाषा सिखा देंगे। उन्होंने विपक्ष के ही नहीं बल्कि के पक्ष के एक विधायक को झिड़क कर बिठा दिया। कई बार उन्होंने गरमा-गरमी के माहौल को जुमले सुनाकार ठहाकों में तब्दील किया।
हर तरफ एक ही चर्चा
हरियाणा में हर तरफ की चर्चा है कि विपक्ष बड़ा मजबूत आया है। सदन में सरकार के हर फैसले से पहले सोचना होगा। बहस होगी तो हंगामा भी होगा। ऐसे में सदन चलाना इस बार बड़ी मशक्कत वाला माना जा रहा है, शायद पहले दिन इसलिए इस मुद़्दे पर काफी देर तक चर्चा हुई। अध्यक्ष ने सभी विधायकों से सहयोग देने को कहा। इस पर इनेलो विधायक दल के नेता ओमप्रकाश चौटाला ने अध्यक्ष को सदन की गरिमा बनाए रखने की बात कह कर अध्यक्ष को आश्वस्त किया है।