यारी बिना बेसुरी ये जिंदगी
जयप्रकाश चौकसे Saturday, October 31, 2009 00:00 [IST]  

London Dreamsमोजार्ट और सेलेरी के जीवन पर लिखे नाटक और फिल्म ‘अमेडियस’ से प्रेरित विपुल शाह की सलमान खान, अजय देवगन और असिन अभिनीत ‘लंदन ड्रीम्स’ दोस्ती के उत्सव को संगीत में ढालकर प्रस्तुत करती है और यारी बिना बेसुरी जिंदगी को रेखांकित करती है। पूरी दुनिया में भाई के रिश्ते से बड़ी मानी गई है दोस्ती और इस फिल्म मंे त्याग को दोस्ती के सार के रूप में प्रस्तुत किया गया है। सलमान खान के लिए रचा गया चरित्र एक अलमस्त नौजवान का है जिसे कोई लोभ नहीं है और वह हर क्षण मस्ती में बिताता है।



मध्यांतर तक उसके हर संवाद पर दर्शक झूम उठते हैं। दरअसल मस्ती का मूड केवल आखिरी पंद्रह मिनट में बदलता है। एक कम प्रतिभाशाली व्यक्ति किस तरह असल प्रतिभा से आतंकित है और उसको नष्ट करने का प्रयास करता है। ईष्र्या के अंगारों पर चलने वाले पात्र के रूप में अजय ने भावना की तीव्रता प्रस्तुत की है। सलमान खान इतने स्वाभाविक लगते हैं मानो अपनी जिंदगी को ही परदे पर प्रस्तुत कर रहे हों। यह सलमान के शिखर दौर की फिल्म है।



अभिनय के साथ ही कर्णप्रिय संगीत है और प्रसून जोशी के गीतों को भी सराहा जाना चाहिए। लंदन और भटिंडा को भी पात्रों की ही तरह प्रस्तुत किया गया है। विपुल शाह ने अमेरिका के भारतीयकरण मंे बहुत स्वतंत्रता ली है और फिल्म के अंत में सुखद अंत की खातिर फिल्म को भटिंडा ड्रीम्स बना दिया है। एक और स्वतंत्रता यह ली है कि हिंदी गाने गाकर आप लंदन में कैसे रॉक स्टार हो सकते हैं। फिल्म भटिंडा से दिल्ली भी हो सकती थी, परंतु बॉक्स ऑफिस पर विदेश क्षेत्र के दबदबे की खातिर लगभग सारी फिल्म लंदन में शूट की है। अगर हनुमान चालीसा को आखिरी दृश्यों मंे दोहरा दिया जाता तो दर्शक अत्यंत प्रसन्न होते।



बहरहाल दोस्ती पर बनी ‘संगम’, ‘अंदाज’, ‘दोस्ती’, ‘कुर्बानी’, ‘दोस्ताना’ और ‘नमक हराम’ जैसी अधिकांश फिल्में सफल रही हैं। पश्चिम में भी रिचर्ड बर्टन अभिनीत ‘बैकेट’ सुपरहिट थी। भाइयों में महाभारत होती है, परंतु दोस्ती में नहीं होती। इस मुकद्दस रिश्ते की पाकीजगी का कोई जवाब नहीं। कृष्ण और सुदामा का रिश्ता भी दोस्ती का ही था। प्राय: यह भी देखा गया है कि मित्रता का आरंभ बचपन से ही होता है। यह कच्ची मिट्टी का रिश्ता है।



फिल्मकार विपुल शाह को मनोरंजन रचने में उनके तमाम तकनीशियनों ने भरपूर साथ दिया है। इस कथा में भावना की बहुत गहराई में जाने की सारी संभावनाओं का दोहन विपुल शाह नहीं कर पाए हैं। सलमान-असिन का प्रेम प्रसंग छोटा है और प्रेम त्रिकोण की नाटकीय संभावना को भी अनदेखा कर दिया है। इन सारी कमियों के बावजूद सलमान और अजय के अभिनय की सहायता से उन्होंने सफल फिल्म बना ली है।

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