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ग्राहक को मिले सुखद अहसास
एन रघुरामन Saturday, October 31, 2009 00:12 [IST]  

वे दिन अब हवा हुए जब आपको अस्पताल में घुसते ही अजीब सी दरुगध का सामना करना पड़ता था। दिल्ली के फोर्टिस ला फेम अस्पताल में आपका स्वागत ऑरेंज बेस की हल्की भीनी-भीनी खुशबू के साथ होता है। आप बेंगलुरु के नेस्ट हॉस्पिटल के रिसेप्शन ऑफिस में पहुंचकर हैरत में पड़ जाएंगे। पुणो के ऑयस्टर एंड पर्ल में आप अपना वक्त कॉफी शॉप या मसाज पार्लर में गुजार सकते हैं, रीडिंग लाउंज में जा सकते हैं, बच्चे की जन्म की खुशी मना सकते हैं और किसी बुक शॉप या गिफ्ट शॉप में भी जा सकते हैं। बेंगलुरु के क्रेडल हॉस्पिटल में सर्वसुविधायुक्त लक्जरी कार आपकी सेवा के लिए तैयार रहती है।



इन अस्पतालों में नए फाइव स्टार प्रसूति कक्ष बच्चे की डिलीवरी की कष्टसाध्य प्रक्रिया की अवधारणा को बदल रहे हैं। मरीजों की समग्र तौर पर बेहतर देखभाल नए दौर के अस्पतालों के नवीन मानदंड हैं और वे उन्हें मरीज के बजाय अपने मेहमान कह सकते हैं। जिस तरह विभिन्न एअरलाइंस ने अपने मुसाफिरों को गेस्ट कहना शुरू कर दिया, उसी तरह अस्पताल भी अपने संबोधन की शब्दावली फिर से तय कर रहे हैं क्योंकि इन अस्पतालों को लगता है कि किसी बच्चे को जन्म देना एक नितांत खुशी का पल है, दुख का नहीं।



सीआईआई-मैक्किंसे की वर्ष 2002 की रिपोर्ट के मुताबिक हर साल तकरीबन 5 करोड़ 45 लाख महिलाओं को प्रसव के लिए अस्पताल में भर्ती किया जाता है और बच्चे के जन्म पर प्रतिवर्ष 6,000 करोड़ रुपए तक खर्च होते हैं, जिसमें से 2,500 करोड़ रुपए ऐसे लोगों से आते हैं जो बड़े पैमाने पर खर्च करते हैं। मैक्किंसे का अनुमान है कि यह बाजार वर्ष 2012 तक 11,000 करोड़ रुपए तक बढ़ सकता है और इसमें बड़े पैमाने पर खर्च करने वाले लोगों की भागीदारी कम से कम 6,400 करोड़ रुपए तक होगी। इस रिपोर्ट से सीख लेते हुए मौजूदा अस्पताल इस विशाल धनराशि में से बड़ा हिस्सा पाने के लिए अपना मेकओवर करने में जुटे हैं।

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