Saturday, October 31, 2009 00:45 [IST]  

danik bhaskarमगर सबसे डरावनी है हमारी असमर्थता

Bhaskar News





IOC fireजयपुर के पेट्रोलियम स्टोरेज टैंक में लगी आग 24 घंटे बीतने पर भी बुझी नहीं है। कइयों की जानें गईं और करोड़ों का तेल स्वाहा हो गया है। यह नुकसान के हद का शुरुआती अंदाजा भर है। शहर के पर्यावरण को हुए नुकसान की तो अभी चर्चा भी शुरू नहीं हुई, पर सबसे महत्वपूर्ण और डरावना रहा हमारी असमर्थता का प्रदर्शन।



इस आग को बुझाने के लिए सेना, अग्निशमन विशेषज्ञों और राज्य के अग्निशमन दलों को तैनात किया गया पर सभी मजबूर थे। हाथ पर हाथ धरे तेल के खत्म हो जाने का इंतजार करने को मजबूर। यह तो स्पष्ट है कि हम ज्वलनशील पदार्थो के भंडारण में माहिर हो गए हैं पर उनके जल उठने पर क्या करें, इसमें माहिरी आना अभी बाकी है।



इंडियन ऑयल डिपो में हुए अग्निकांड की जांच के लिए पेट्रोलियम मंत्रालय ने जांच कमेटी के गठन की घोषणा की है। यह पांच सदस्यीय कमेटी 6 सप्ताह में आग के कारणों और भविष्य में ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति रोकने से संबंधित उपाय सुझाते हुए सरकार को रिपोर्ट देगी। पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा के मुताबिक यह आग अप्रत्याशित थी। पेट्रोल ढोने वाले हर टैंकर पर लिखा होता है ‘अति-ज्वलनशील’, क्योंकि तेल का जल उठना अप्रत्याशित नहीं होता। हां, इस पैमाने पर आग लगेगी, यह शायद उनके मंत्रालय ने नहीं सोचा था।



यह आग एक पेट्रोल टंकी से रिसाव शुरू होने के चार घंटे बाद लगी। रिसते पेट्रोल को चिंगारी कहां से मिली यह तो जांच से ही पता लगेगा, पर इतना स्पष्ट है कि इस रिसाव से और उसके बाद लगी आग से निपटने के पर्याप्त साधन इंडियन ऑयल के अधिकारियों के पास नहीं थे। जहां अस्सी लाख लीटर पेट्रोलियम पदार्थ का भंडारण हो, वहां पर तेल में आग को बुझाने के इंतजाम का नहीं होना आश्चर्यजनक है। फोम बनाने वाले पाउडर जब तक मथुरा से जयपुर पहुंचे, आग बेकाबू हो चुकी थी।



हेलीकॉप्टर से अग्नि-शामक की बौछार का विकल्प हमारे पास नहीं। चिंता का विषय यह है कि ऐसे तेल डिपो देश के सभी बड़े शहरों में हैं। ये डिपो शहर के बाहरी क्षेत्र में बनाए गए पर आबादी बढ़ने के साथ कई शहरों ने इन्हें अपने अंदर कर लिया। कई मुल्कों में अग्निकांडों के बाद दुर्घटना-नियंत्रण के लिए इन टंकियों में रिसाव रोकने के यंत्र लगे हैं, अलार्म की व्यवस्था है और फोम के छिड़काव हेतु स्वचालित यंत्र हैं। इस आग से सीख लेकर हमें ऐसे सुरक्षा के उपायों पर तुरंत ध्यान देना होगा क्योंकि अगली बार अप्रत्याशित होने का बहाना नहीं होगा।





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