चंडीगढ़. धान पर केंद्र के मात्र 50 रुपए प्रति क्विंटल बोनस देने से पंजाब के किसान बेशक निराश हों, लेकिन प्रदेश सरकार ने अभी तक उम्मीद का दामन नहीं छोड़ा है। गुरुवार को केंद्रीय कैबिनेट की मीटिंग में प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने इस बात के संकेत दिए थे कि पंजाब को बिजली के अतिरिक्त खर्च के लिए कुछ न कुछ राहत दी जानी चाहिए।
पंजाब सरकार ने सूखे के चलते दूसरे सेक्टर्स की बिजली एग्रीकल्चर सेक्टर को देकर धान की फसल बचाई थी। प्रधानमंत्री ने योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह आहलुवालिया से इसके लिए फंड मुहैया कराने को कहा है। मुख्यमंत्री कार्यालय के सूत्रों का कहना है कि बादल ने भी शुक्रवार देर शाम आहलुवालिया से बात की और पंजाब के बिजली पैकेज की फाइल जल्द क्लीयर करने का आग्रह किया।
पंजाब सरकार ने केंद्र से राहत के रूप में 1440 करोड़ रुपए का बिजली पैकेज मांगा है। हालांकि इससे पहले कभी भी खेती के लिए अतिरिक्त बिजली खर्च करने पर केंद्र की ओर से पैकेज नहीं दिया गया, लेकिन इस बार परिस्थितियां बदली हुई हैं। देशभर में सूखे के हालात होने से धान की कमी पैदा होने के आसार बन गए थे। ऐसे में पंजाब की अकाली-भाजपा सरकार ने किसानों को धान में सिंचाई के लिए अतिरिक्त बिजली मुहैया कराकर फसल को बचा लिया।
उसके बाद केंद्र ने राज्य से सूखा राहत पैकेज के लिए प्रस्ताव मांगा था। राज्य सरकार ने जो प्रस्ताव तैयार किया था उसके अनुसार, बिजली बोर्ड ने इंडस्ट्री, घरेलू और व्यावसायिक सेक्टर की 3552 मिलियन यूनिट बिजली एग्रीकल्चर सेक्टर को दी। यह बिजली करीब 1440 करोड़ रुपए की बनती है। हालांकि नहरों की हालत को सुधारने के लिए भी राज्य सरकार ने 1600 करोड़ का अलग से प्रोजेक्ट मांगा था लेकिन उस पर अभी तक कोई फैसला नहीं हुआ है।