Chandigarh
आग से बचा लाया टाइगर, अस्पताल में गई जान
शायदा/संजीव महाजन Saturday, October 31, 2009 02:09 [IST]  

Dogचंडीगढ़. कैम्बवाला की उस झुग्गी में तीन प्राणी थे- पांच बरस का टाइगर, डेढ़ बरस का संदीप और तीन बरस का कुलदीप। टाइगर सबसे बड़ा था और उसकी जिम्मेदारी भी सबसे ज्यादा थी।



घर का मालिक हरिराम जाते वक्त उसे कहकर जाता था- टाइगर, घर का ख्याल रखना और बच्चों का भी। हमेशा तो यही करता रहा वह, लेकिन वीरवार का दिन इस घर के लिए कहर बनकर आया। हरिराम और उसकी पत्नी गीता रोज की तरह काम पर चले गए। झुग्गी में माचिस की डिब्बी से खेलते हुए कुलदीप तीलियां जलाने लगा।



इसी बीच सरकंडों से बनी झुग्गी में आग फैल गई और सब जलने लगा। टाइगर की रस्सी जली और वह बाहर की तरफ भागा। घर के बाहर भीड़ जमा हो चुकी थी, सब कोशिश कर रहे थे कि किसी तरह बच्चों को बचाया जा सके, लेकिन जान खतरे में डालकर अंदर जाने की हिम्मत किसी ने नहीं की। कोई पानी लाने, तो कोई फायरब्रिगेड बुलाने की बात कर रहा था। एकाएक टाइगर जलती झुग्गी के अंदर दौड़ गया और संदीप को मुंह में दबाकर खींचता हुआ वापस लौटा। जब तक लोगों ने संदीप को संभाला, टाइगर फिर झुग्गी में गया और कुलदीप को खींच कर ले आया।



टाइगर बच्चों को मौत के मुंह से जिंदा खींच कर लाया था। झुलसे हुए बच्चों को अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्होंने दम तोड़ दिया। ये कहानी नहीं है, बल्कि एक हादसे का बयान है, जिसमें हरिराम के जर्मन शेफर्ड नस्ल के पालतू कुत्ते टाइगर ने बच्चों को बचाने की पूरी कोशिश की। इस कोशिश में टाइगर का मुंह झुलस गया।



वीरवार को जब हरिराम और गीता काम पर गए तो घर पर चार बच्चे नेकराम, निकित, संदीप और कुलदीप ही थे। नौ साल का नेकराम और पांच साल का निकित झुग्गी के बाहर खेल रहे थे। डेढ़ साल का संदीप और तीन साल का कुलदीप झुग्गी के अंदर थे।



पूरी न हुई मुराद



डेढ़ साल के संदीप ने अपनी जिंदगी में रोशनी की एक किरण नहीं देखी थी। वह जन्म से ही अंधा था और इस सिलसले में उसका पीजीआई में इलाज भी चल रहा था। हरीराम ने तो अपनी आंखें बेटे संदीप को दान करने के लिए रजिस्ट्रेशन भी करा रखा था, लेकिन उसकी यह मुराद पूरी न हो सकी। पिता की आंखों से दुनिया देखने से पहले ही बेटे की मौत हो गई।



आर्मी ट्रेंड है टाइगर



टाइगर आर्मी का ट्रेंड डॉग है। पांच साल का टाइगर पहले दो साल तक एक आर्मी अफसर के घर पर रहा और वहां उसे ट्रेनिंग भी दी गई। आर्मी अफसर की पोस्टिंग हुई, तो उसने टाइगर को घरेलू नौकर नन्का सिंह को दे दिया। नन्का से टाइगर उसके बेटे हरिराम के पास पहुंच गया। हरीराम ने बताया कि वह और उसकी पत्नी रोज ही काम पर निकल जाते थे, घर पर टाइगर ही बच्चों को संभालता था और किसी को इधर उधर नहीं जाने देता था।

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