भोपाल. राजधानी में निशातपुरा में घनी बस्तियों के बीच बने इंडियन आयल कॉपरेरेशन (आईओसी) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉपरेरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) के आयल डिपो के सुरक्षा इंतजामों के हाल जानकर आप हैरत में पड़ सकते हैं और हादसे की आशंका से ही दिल दहल सकता है। जयपुर में हुए आयल डिपो के हादसे के बाद भी यहां के हालात गंभीर हैं।
आयल डिपो के आसपास कई कॉलोनियों में तकरीबन 50 हजार की आबादी के लिए डिपो की व्यवस्थाएं रोंगटे खड़े कर देने वाली हैं। सवा दो करोड़ लीटर पेट्रोलियम पदार्थ की क्षमता वाले दो डिपो के प्रबंधन और सुरक्षा के लिए मात्र 17 कर्मचारी हैं। इसकी चारदीवारी की ऊंचाई इतनी है कि कोई भी आसानी से फांद जाए। बस्तियों में नल, हैंडपंपों में तेलयुक्त पानी लंबे समय से आ रहा है, जिसमें तीली रखते ही आग लग जाती है।
खतरे में कॉलोनियां
शिवनगर, गीतानगर, अटल-नेहरू नगर, कल्याण नगर, शबरी नगर, लोधी नगर, भानपुरा, छोला, कैंची छोला आदि बस्तियां यहां हैं। डिपो के सामने रेल लाइन, यार्ड, गाड़ियों की आवाजाही सुरक्षा के लिए खतरा है।
आटो फायर सिस्टम नहीं
जयपुर आयल डिपो में अग्नि सुरक्षा के लिए लगाया गया आटो फायर सिस्टम भोपाल के डिपो में नहीं है। जयपुर डिपो में हुए हादसे की भयावहता इसी से जानी जा सकती है कि वहां इस सिस्टम को भी शुरू होने का मौका नहीं मिल सका। इंडियन आयल कॉर्पाेरेशन के डिपो मैनेजर प्रभाकर कुमार का कहना है कि टैंक में कूलिंग के लिए स्प्रिंकलर सिस्टम लगे हैं।
डिपो के आसपास पानी की पाइप लाइन हैं और छह हजार लीटर क्षमता वाले पानी के दो टैंक बने हैं। फोम ट्रॉली व इससे जुड़े उपकरण भी लगाए गए हैं। एचपीसीएल डिपो के मैनेजर एम महालक्ष्मी का कहना है कि अग्नि पर काबू पाने के पूरे इंतजाम हैं। डिपो हटाने का निर्णय मुंबई स्थित मुख्यालय को करना है।
पूर्व में लग चुकी है आग
रहवासियों के अनुसार करीब दस वर्ष पूर्व डिपो से महज 20 मीटर दूरी पर स्थित रेलवे यार्ड में आग लग गई थी। इसी तरह करीब दो वर्ष पूर्व इंडियन आयल के डिपो में शॉर्ट सर्किट से आग लगी थी।
डिपो की स्थिति
छोला क्षेत्र में एक डिपो तीन एकड़ क्षेत्रफल में फैला हुआ है। दोनों डिपो को मिलाकर क्षेत्रफल छह एकड़ के करीब है। पेट्रोल-डीजल भंडारण के लिए एक डिपो में तीन रैक हैं, जिनमें पेट्रोलियम भंडारण लीटर में निकालें तो प्रति डिपो क्षमता एक करोड़ 13 लाख 40 हजार लीटर है। दो डिपो में यह क्षमता दो करोड़ 26 लाख लीटर होगी। इनसे टैंकरों में राजधानी सहित आसपास के 12 जिलों को पेट्रोलियम पदार्थ की आपूर्ति की जाती है।
टैंक में रिसाव की आशंका
दोनों डिपो से करीब चार किलोमीटर के दायरे में फैली कॉलोनियों में लगे बोरिंग से तेल मिला पानी आ रहा है। रहवासियों को आशंका है कि डिपो के टैंकों से पेट्रोलियम पदार्थ रिसकर जमीन में उनके बोरिंग के पानी से मिल रहा है। वर्ष 2005 में गीता नगर के नंदकिशोर दुबे के बोरिंग में इतना पेट्रोलियम आया कि तीली दिखाते ही पानी में आग लगने लगी थी। इस स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने बोरिंग को सील कर दिया। यहां लगे हैंडपंप में तेल मिला अब भी आ रहा है। यह स्थिति गंभीर बताई जा रही है।