खसरे चुन-चुनकर बनाई ‘जागीर’
वीरेंद्र तिवारी Saturday, October 31, 2009 04:22 [IST]  

indoreइंदौर. सात हाउसिंग सोसायटियों की जमीनों को ठिकाने लगाने वाले जितेंद्र उर्फ हैप्पी पिता सूरजप्रकाश धवन के राज धीरे-धीरे खुलने लगे हैं। रिश्तेदारों को ढाल बना सोसायटियों पर काबिज होने वाले हैप्पी धवन ने नक्शे में चुन-चुनकर खसरों को अपने और अपनी फर्म के नाम करा लिया।

यही कारण है कि कनाड़िया रोड से लगी 22 एकड़ जमीन का एक तरफा बेल्ट धवन बंधुओं के नाम है। ‘भास्कर’ के पास इनके द्वारा जमीनों में की गई अफरातफरी के प्रमाण मौजूद हैं। नवनीत प्लाजा में आनंदश्री ज्यूस सेंटर चलाने वाले हैप्पी धवन द्वारा शुरू किया गया जमीनों का यह खेल ज्यादा पुराना नहीं है।

षड्यंत्र की शुरुआत तीन साल पहले उस वक्त हुई, जब श्रीकांत घंटे और सुभाष दुबे के साथ मिलकर धवन ने नवभारत गृहनिर्माण संस्था पर कब्जा कर लिया। 24 सितम्बर 2006 को आदेश क्रमांक 3934/19.09.06 के माध्यम से हैप्पी धवन का भांजा मनोज बलदेव मेहता नवभारत संस्था का अध्यक्ष बन गया।

इसी के साथ साला राजेश डाबर और मामा की लड़की रेणु चौपड़ा संचालक मंडल में आ गई। इसके बाद हैप्पी धवन ने सबसे पहले संस्था की खजराना हल्का नंबर 16 की खसरा नंबर 1157 रकबा .223 हेक्टअर जमीन एक किसान की मदद से अपने नाम करा ली। इसके बाद शुरू हुआ सोसायटियों की जमीनों को हड़पने का सिलसिला, जो कुछ माह पहले तक चलता रहा।

जांच को मिली नई दिशा

नवभारत संस्था सहित छह सोसायटियों की जमीनों की हेराफेरी में धवन बंधुओं के शामिल होने की जानकारियां मिलने के बाद अब पुलिस के जांच की दिशा बदल गई है। पुलिस को जैसे-जैसे सूचनाएं मिलती जा रही है वह रिमांड कस्टडी में मौजूद नवभारत के पूर्व कर्ता-धर्ता सुभाष दुबे और श्रीकांत घंटे से उन सूचनाओं की लगातार तस्दीक करती जा रही है। बताया जाता है कि घंटे ने उसके और सुभाष दुबे के हैप्पी-लकी धवन से रिश्तों को स्वीकार कर कई जानकारियां पुलिस को दी है।

रंक से राजा बनने की कहानी

हैप्पी धवन को जानने वाले बताते हैं कि उसे फलों का व्यवसाय विरासत में मिला। फ्रूट मार्केट में इनके पूर्वजों की संयुक्त दुकान थी। एक बाइक के साथ जिंदगी शुरू करने वाला हैप्पी पहले एक और दो प्रतिशत पर साहूकारों से रुपए लेकर उसे पांच से दस रुपए प्रति सैकड़ा पर लोगों को देता था।

बाद में हैप्पी और उसके भाई राजीव उर्फ लक्की धवन ने मिलकर नवनीत प्लाजा में आनंदश्री ज्यूस सेंटर खोला। धवन बंधुओं के जीवन में सहकारी संस्थाएं पारस पत्थर बनकर र्आई। यही कारण है कि महज 3 सालों में वह रंक से राजा बन गया और आज राजस्व रिकॉर्ड में 44 करोड़ की सम्पत्ति का मालिक है।

जमीन की कीमत करीब 44 करोड़

कनाड़िया रोड संचारनगर एक्स.से लगा 22 एकड़ जमीन का ये बेल्ट सोने के अंडे जैसा है। इस क्षेत्र में बसाहट के लिए जमीन की जमकर मारामारी है। जमीनों के व्यवसाय से जुड़े लोगों के मुताबिक इस जमीन की कीमत 2 करोड़ रु. प्रति एकड़ है। इस रेट के लिहाज से आकलन किया जाए तो इसकी कीमत 44 करोड़ होती है। वहीं यदि धवन बंधु इस पर कालोनी काटते तो उन्हें कुल 5 लाख 72 हजार वर्गफीट जगह मिलती जिसकी कीमत 15 सौ के रेट से करीब 86 करोड़ होती है।

रिश्तों को स्वीकारा

पुलिस को नवभारत और जितेंद्र उर्फ हैप्पी धवन से जुड़ी कई अहम जानकारियां हाथ लगी थी। पूछताछ करने पर श्रीकांत घंटे और सुभाष दुबे ने कई बातों की पुष्टि की है। पूछताछ जारी है। - आकाश जिंदल, एड.एसपी इंदौर

वैभव महालक्ष्मी रीयल इस्टेट के नाम

भागीदार जितेंद-राजीव्र पिता सूरजप्रकाश धवन

खसरा नंबर संस्था का नाम (वर्ष) 1157 नवभारत गृ.नि.(2000-01) 1155/2 डाकतार गृ.नि (2000-01) 1143 टेलीकॉम गृ.नि(1999-2000) 1137/1 डाकतार गृ.नि (2000-01) 1123 शासकीय वाहन चालक गृ.नि(2000-01) 1122 शासकीय वाहन चालक गृ.नि(2000-01) 1111/1 डाकतार कर्मचारी गृ.नि.(2000-01) 1098 सारथी गृह निर्माण संस्था(2001-02)1189/2 शताब्दी गृ.नि. सहकारी संस्था (2001-02)

जितेंद्र धवन उर्फ हैप्पी के नाम

1112/1 हरियाणा गृहनिर्माण संस्था(2004-05)1124 हरियाणा गृहनिर्माण संस्था(2004-05)1125 हरियाणा गृहनिर्माण संस्था(2004-05)1136 हरियाणा गृहनिर्माण संस्था(2004-05)1137/2 हरियाणा गृहनिर्माण संस्था(2004-05)1148 हरियाणा गृहनिर्माण संस्था(2004-05)1152/इइइ-2 हरियाणा गृहनिर्माण संस्था(2004-05)1155/1473 हरियाणा गृहनिर्माण संस्था(2004-05)1156 हरियाणा गृहनिर्माण संस्था(2004-05)

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