जयपुर. आईओसी के डिपो में हुए अग्निकांड से जले करीब एक करोड़ लीटर पेट्रोल, डीजल और केरोसिन से करीब 655 करोड़ लीटर जहरीली गैसें वातावरण में मिल चुकी हैं। इसका असर लंबे समय तक आस पास के क्षेत्र के लोगों, वनस्पति, प्राणियों, कृषि क्षेत्र की जमीन को नुकसान झेलना पड़ेगा। भारी मात्रा में ईंधन जलने से साइलेंट किलर कहलाने वाली कार्बन मोनो ऑक्साइड ही 150 करोड़ लीटर वातावरण में घुल चुकी है।
कार्बन मॉनो आक्साइड के सांस के साथ अंदर जाने पर पहले व्यक्ति बेहोश होता है और ज्यादा जाते ही मौत भी हो सकती है। दावानल से करीब 425 करोड़ लीटर कार्बन डाई ऑक्साइड पैदा हो चुकी है जो 10 से 40 किलोमीटर क्षेत्र में कुछ दिन में काली परत बिछा देगी और सांस तथा फेफड़ों की कई बीमारियां फैला सकती हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार डिपो का तापमान 1400 डिग्री फोरेनहाइट तक पहुंचने से थर्मल पॉल्यूशन भी फैला है। इससे आस पास के इलाकों के लोगों को सिरदर्द, खुजली, चिड़चिड़ापन जैसी समस्याओं से गुजरना पड़ सकता है।
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हो सकती है एसिड रेन
जयपुर. एमएनआईटी के निदेशक प्रो. आर.पी. दहिया ने बताया कि हालांकि अभी बारिश का मौसम नहीं है। लेकिन सर्दी में कुछ समय बाद जाड़ा पड़ेगा और ओस गिरेगी। एक करोड़ लीटर तेल जलने से करीब सौ करोड़ लीटर नाइट्रोजन और सल्फर की गैसें पैदा हुई हैं। ये वातावरण में पानी की बूंदों के साथ मिलकर एसिड बनाएंगी। ऐसे में जाड़े के समय जयपुर व आसपास कहीं-कहीं अम्लीय वर्षा भी हो सकती है। इसका असर लोगों के स्वास्थ्य, फल सब्जियों और भवनों पर दिखेगा। अम्लीय पानी से भवनों का रंग फीका पड़ सकता है।
अध्ययन में बताया टैंक बुझने का समय
एमएनआईटी संस्थान ने आईओसी डिपो में स्थित सभी तेल टेंकों में भरे तेल के पूरी तरह से जलने के समय का आंकलन किया। संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने बताया कि पेट्रोल और डीजल के टैंकों क क्षेत्रफल 176.63 वर्गमीटर है और केरोसीन के टैंकों का क्षेत्रफल 38.47 वर्गमीटर है।
तीनों प्रकार के ईंधन की ज्वलनशीलता की दर के अनुसार पेट्रोल और डीजल के टैंक को जलने में 24 से 30 घंटे लगेंगे। केरोसीन के टैंक को जलने में 39.4 घंटे लगेंगे। टैंक फटने से समय कुछ कम भी हो सकता है और भूमिगत टैंक के ईंधन के जलने का समय बढ़ भी सकता है। पेट्रोल और डीजल के जलने की दर 15 से 16 लीटर प्रति मिनट प्रति वर्गमीटर है।
किसमें क्या भरा है
5 टैंकों में 50 लाख लीटर डीजल
चार टैंकों में 40 लाख लीटर पेट्रोल
दो टैंकों में दो लाख लीटर केरोसिन
भूमिगत टैंकों में इंजन ऑयल भी करीब 5 हजार लीटर बताया जाता है। सभी तथ्य एमएनआईटी के निदेशक प्रो. आर.पी. दहिया, डॉ. महेश कुमार, राजस्थान यूनिवर्सिटी के प्रो.के.एस. गुप्ता के आकलन व शोध के आधार पर।
1 माह तक 15 किमी परिधि में असर
जयपुर. आईओसी डिपो में आग के बाद कार्बन डाई ऑक्साइड व कार्बन मोनो ऑक्साइड, सल्फर डाइ ऑक्साइड निकली गैस आने वाले समय में घातक हो सकती है। इन दोनों गैस का असर 10 से 15 किलोमीटर की परिधि में लोगों पर करीब एक माह तक रहेगा। चिकित्सकों के अनुसार पेट्रोलियम पदार्थो के जलने से निकली गैस श्वास के साथ शरीर में पहुंच जाती है और फेफड़ों को इंफेक्शन करती है। तापमान बढ़ने से तेज हवा की सांस लेने पर नलियों में सूजन के साथ सांस लेने में दिक्कत हो सकती है।
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इसके साथ ही आंखों में जलन, आंखों से धुंधलापन व त्वचा पर साइड इफेक्ट हो सकता है। हालांकि खुले धुएं से नुकसान होने की संभावना कम रहती है। मनोचिकित्सक डॉ. आर.के. सोलंकी का कहना है कि इस तरह के धमाकों से सभी आशंकित हो जाते हैं। माता—पिता को चाहिए कि वे अपने बच्चों के सामने बार—बार उस घटना के बारे में जिक्र नहीं करे। इस तरह की बातचीत से उनके दिमाग में वो बात हमेशा के लिए बैठ जाती है, जिससे परेशानी हो सकती है।
बीमारियों की आशंका: रेस्क्यू कैंप में भीड़ होने से एक-दूसरे से खांसी, जुकाम, मलेरिया व डेंगू आदि फैलने की संभावना है। जलजनित बीमारियां एवं प्रदूषित वातावरण से वेक्टर बोर्न डिजीज भी हो सकती है। अस्थमा व दमा के मरीजों को सांस लेने में दिक्कत व एलर्जी बढ़ सकती है। आग के गुबार वाले दृश्य को देखने से सदमा बैठ सकता है।
बाय इन्विटेशन: कार्बन मोनो ऑक्साइड से बच्चे ज्यादा प्रभावित होते हैं। सांस लेने पर यह गैस रक्त के साथ मिलकर काबरेक्सी हिमोग्लोबिन बनती है। जिसकी मात्रा बढ़ जाने से शरीर की रक्त कणिकाओं की आक्सीजन ले जाने की क्षमता कम हो जाती है, बच्चों में बेहोशी की हालत आ सकती है। शरीर में कार्बन मोनो आक्साइड की मात्रा 20 फीसदी होने पर दौरे तथा 60 फीसदी से अधिक होने पर बच्चों को अधिक खतरा हो सकता है।
- डॉ. अशोक गुप्ताजेके लोन हॉस्पिटल
ब्लास्ट से वातावरण में फैली जहरीली गैस आसपास के पांच से सात किलोमीटर की परिधि में रहने वाले लोगों की आंखों पर असर कर सकती है और जलन, धुंधला दिखाई देना एवं पानी निकलने की संभावना है। आंखों में जलन होने पर बार—बार सादा पानी से उसे धोना चाहिए तथा ज्यादा जलन होने पर चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए।
- डॉ. पी.के. माथुर, नेत्र विभाग, एसएमएस अस्पताल
जहरीली गैस से चर्म रोग फैलने की आशंका है। खुजली, जलन व धुएं से डर्मेटाइटिस हो सकती है। इससे बचने के लिए पूरे कपड़े पहने तथा शरीर पर नारियल का तेल लगाना जरूरी है।
- डॉ. दिनेश माथुर, विभागाध्यक्ष चर्म रोग विभाग, एसएमएस अस्पताल
कार्बन मोनो आक्साइड व हाइड्रोजन सल्फाइड की मात्रा बढ़ने से अस्थमा, दमा, बुजुर्ग व बच्चों के लिए खतरे का संकेत है। इससे बचने के लिए 8-10 किमी की परिधि के लोगों को वह स्थान छोड़ देना चाहिए। साथ ही नाक पर गीला कपड़ा रखना चाहिए।
- डॉ. नरेन्द्र खिप्पल,वक्ष एवं क्षय रोग अस्पताल
प्रत्यक्षदर्शियों में प्रोस्टट्रोमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर व पैनिक डिसआर्डर बीमारी बढ़ने की आशंका रहेगी। बीमारी में मरीज घटना को याद कर डर जाता है। गुमसुम व अचानक भयभीत हो जाएगा। वातावरण में कार्बन मोनोक्साइड व कार्बन डाई आक्साइड गैस की मात्रा बढ़ने से बच्चे निमोनिया से ग्रस्त हो जाएंगे। नींद कम आने व चिड़चिडेपन की आशंका है।
- डॉ. आई.डी. गुप्ता मनोरोग चिकित्सक