मोनालीसा की मुस्कान नहीं ‘दिमाग’ का कमाल
एजेंसी Saturday, October 31, 2009 08:32 [IST]  

monalisaलंदन. दुनिया की सबसे मशहूर पेंटिंग्स में से एक मोनालीसा की रहस्यमयी मुस्कान का राज वैज्ञानिकों ने स्पष्ट कर दिया है। उनका मानना है कि जो लोग मानते हैं कि मोनालीसा की मुस्कान बदलती रहती है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि उनकी आंख का कौन सा हिस्सा इस पेंटिंग को पहले देखता है।

इस पेंटिंग के बारे में लोगों का कहना है कि कभी मोनालीसा की छवि गंभीर लगती है, कभी एक अलग सी चमक वाली दिखती है तो कभी झूठी हंसी नजर आती है। अब वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि उन्हें मोनालीसा के बदलते व्यवहार का जवाब मिल गया है। यह जवाब हमारी आंखों द्वारा दिमाग को भेजने वाले मिश्रित संकेतों में छिपा है।

वैज्ञानिकों की मानें तो मोनालीसा की मुस्कुराहट हमें वैसी दिखती है, जैसी उसकी छवि हमारे रेटिना के सैल्स में बन जाती है और किस माध्यम से वह हमारे दिमाग तक पहुंचती है। कई बार एक माध्यम दूसरे से ऊपर हो जाता है और हमें मोनालीसा की मुस्कुराहट दिखाई देती है, वहीं कई बार ऐसा न होने पर मुस्कुराहट नहीं दिख पाती।

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