सुरक्षा परिषद में भारत की दावेदारी को बुश का समर्थन
Agency Sunday, November 01, 2009 01:03 [IST]  

नई दिल्ली. अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज डब्लू बुश ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिए भारत की दावेदारी का समर्थन किया है। हालांकि, उन्होंने सुरक्षा परिषद के विस्तार में निहित जटिलाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि परिषद के आकार, मापदंड व वीटो अधिकार जैसे कई मुद्दे अभी सुलझाए जाने हैं।



शनिवार को यहां एक संगोष्ठि को संबोधित करते हुए बुश ने वैश्विक मंच में भारत की महती भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा, ‘सुरक्षा परिषद में भारत को स्थायी सीट दिलाने में अमेरिका को मदद करनी चाहिए।’ पूर्व राष्ट्रपति के अनुसार, भारत अब दुनिया का एक शक्तिशाली लोकतांत्रिक देश है।



भारत को स्थायी सीट मिलने की संभावनाओं का जिक्र करते हुए बुश ने हिंदुस्तान टाइम्स लीडरशिप समिट में कहा कि इस मामले में राजनीति बहुत मुश्किल होती है। फिर यह सवाल भी सामने हैं कि सुरक्षा परिषद के विस्तार में कितने देश शामिल किए जाएं, उनमें से कितनों को वीटो का अधिकार मिले और इसका मापदंड व इसकी बनावट कैसी हो।



यहां हैं अड़चनें :



मापदंड : बुश के मुताबिक, इस मामले में एशिया से जापान के लिए स्थायी सीट पाने का मौका अधिक है।



आकार : सुरक्षा परिषद के मौजूदा आकार में पांच से 10 फीसदी बढ़ोतरी का सुझाव दिया गया है। हालांकि, बुश ने इस वैश्विक संस्था के आकार को बहुत बड़ा करने के औचित्य पर हैरानी भी जताई।



भारत-अमेरिकी संबंध : बुश ने भारत और अमेरिका के बीच सामरिक संबंधों की मजबूती पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका को अपने आव्रजन नियमों की समीक्षा कर भारत से आने वाले कुशल कामगारों को एच1बी वीजा जारी करना चाहिए, क्योंकि यह अमेरिकी अर्थव्यवस्था के दीर्घावधि हित में होगा। उन्होंने इन धारणाओं को नकार दिया कि उनके कार्यकाल में पाकिस्तान ने आतंक रोधी अभियानों के लिए मिली अमेरिकी मदद का भारत के खिलाफ उपयोग किया था। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में अमेरिका उन तत्वों की तलाश कर रहा था, जो आतंकियों से लड़ सकते हों।

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