नई दिल्ली. कर्नाटक में मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा समर्थक और विरोधियों के दिल्ली कूच करने के साथ ही भाजपा ने लगातार तीसरे दिन भी दोहराया है कि मुख्यमंत्री को हटाने का कोई सवाल नहीं है। लेकिन पार्टी के वरिष्ठ नेता यह मान रहे हैं कि दक्षिण में भाजपा के फतह किए इस पहले किले में सेंध लगने के पीछे मुख्यमंत्री की मनमानी एक बड़ी वजह है। ऐसी स्थिति में भाजपा नेतृत्व के लिए कर्नाटक में खिले इस ‘कमल’ को बचाए रखना काफी चुनौती भरा साबित हो रहा है।
केंद्रीय नेतृत्व ने अभी तक राज्य के राजनीतिक संकट को हल करने के लिए कोई फॉमरूला तैयार नहीं किया है। पर इतना तय है कि विरोधियों को कड़ा संदेश देने के साथ-साथ मुख्यमंत्री को भी अपनी कार्यशैली सुधारने की घुट्टी पिलाई जाएगी। उधर, बेंगलुरू में मुख्यमंत्री ने हाईकमान का हवाला देते हुए कहा कि उन्हें बदले जाने की खबर बेबुनियाद है। बागी रेड्डी बंधुओं के विद्रोह की धार कुंद करने के मकसद से उन्होंने जगदीश शेट्टार को मंत्रिमंडल में शामिल करने की पेशकश भी की। बागियों की ओर से नेता प्रोजेक्ट किए जा रहे शेट्टार देर शाम दिल्ली पहुंच गए।
शनिवार को कर्नाटक भाजपा के संकटमोचक बनाए गए अरुण जेटली की व्यस्तता और अध्यक्ष राजनाथ सिंह के भोपाल दौरे के चलते इस मसले पर कोई बैठक नहीं हो पाई। लेकिन इसी बीच मुख्यमंत्री के दूत बनकर दिल्ली पहुंचे गृहमंत्री बीएस आचार्य व वरिष्ठ नेता धनंजय कुमार ने संगठन महामंत्री रामलाल से मुलाकात की। उन्होंने मीडिया के सामने दोहराया कि कर्नाटक की भाजपा सरकार स्थिर है और विधायकों का बहुमत मुख्यमंत्री के साथ है। रविवार को राजस्व मंत्री जी. करुणाकर रेड्डी के दिल्ली आने की संभावना है। बुधवार चार नवंबर को मुख्यमंत्री येदियुरप्पा के दिल्ली आने की संभावना जताई जा रही है।
दूसरी ओर, कर्नाटक की राजनीति से करीब से जुड़ीं वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज ने एक कार्यक्रम में इस बात से साफ इनकार किया कि उन्हें मौजूदा संकट को संभालने का जिम्मा सौंपा गया है। स्वराज का कहना था कि यह मामला अरुण जेटली व वेंकैया नायडू के अधीन है। सूत्रों की मानें तो स्वराज ने पार्टी प्रमुख राजनाथ सिंह से फोन पर बातचीत में इस बात पर जोर दिया कि अगर प्रदेश के एक या दो नेता आकर मिलें तो ठीक है, मगर विधायक समूह शक्तिप्रदर्शन करने दिल्ली धमक जाए तो आलाकमान का उनसे बात करना उचित नहीं होगा।