देहातों में खोजी जाएंगी खेल प्रतिभाएं
भास्कर न्यूज Sunday, November 01, 2009 01:50 [IST]  

रायपुर. अब सूबे के देहातों से खेल प्रतिभाओं की खोज शुरू होगी। उन्हें तराशा जाएगा और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल स्पर्धाओं में दमखम दिखाने योग्य बनाया जाएगा।



यह सब ‘पंचायत युवा क्रीड़ा और खेल अभियान’ (पाइका) योजना के तहत होगा। केंद्र प्रवर्तित इस योजना के लिए छत्तीसगढ़ को केंद्र ने 17.18 करोड़ रुपए दिए हैं। इसमें राज्य सरकार भी 2.66 करोड़ रुपए लगाएगी। खेलों का आयोजन शहरों की बजाए गांवों में ग्राम पंचायत स्तर पर होगा।



खेल एवं युवा कल्याण ने योजना पर अमल के लिए आज रणनीति बनाई। हालांकि खेलों की औपचारिक शुरूआत रायपुर जिले से हो चुकी है, लेकिन योजना पर अमल के लिए खेलमंत्री लता उसेंडी की अध्यक्षता में शनिवार को राज्य स्तरीय समिति ने ब्लूप्रिंट तैयार किया। पहले चरण में हर जिले की 10 फीसदी पंचायतों में योजना शुरू होगी। बस्तर, छिंदगढ़, जगदलपुर, कोंटा, सरगुजा जैसे आदिवासी बेल्ट को इसमें प्राथमिकता दी जाएगी।



दिलचस्प यह कि हर पंचायत में एक क्रीड़ाश्री की नियुक्ति होगी, जो खेलों का जानकार व रुचि रखने वाला होगा। उसे 500 रुपए मासिक मानदेय दिया जाएगा। उसे 500 रुपए खेल गतिविधियों के लिए भी मिलेंगे। अधिकारियों ने बताया कि एक लाख में खेल मैदान न बनने पर विभाग और मदद करने के प्रयास करेगा।



ये खेल होंगे : कबड्डी, खोखो, वॉलीबाल, एथलेटिक्स, साइकिलिंग, फुटबॉल, हॉकी, कुश्ती, भारोत्तोलन व तीरंदाजी।



खास बातें -
हर पंचायत में एक खेल मैदान
खेल मैदान के लिए मिलेंगे एक-एक लाख
हर साल 10 हजार रुपए की खेल सामग्री
हर पंचायत में एक क्रीड़ाश्री की नियुक्ति
क्रीड़ाश्री को 500 रुपए मानदेय हर माह
हर माह 500 रुपए खेल गतिविधियों के लिए
जिला व ब्लाक स्तर पर खेल प्रतियोगिताएं
एकल और टीम गेम



वर्जन -



‘अंतिम छोर से खेल भावना का विकास करना योजना का उद्देश्य है। खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाकर बड़ी से बड़ी प्रतियोगिताओं में शामिल होने अवसर देंगे।’
लता उसेंडी, खेलमंत्री

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