चंडीगढ़. रात के 10.30 बज रहे थे। शिशु निकेतन पब्लिक स्कूल, सेक्टर-43 के ज्यादातर बच्चों का कोई पता नहीं था। सुबह स्कल की छह बसें 370 बच्चों को लेकर मोरनी गई थी। शाम छह बजे तक इनको वापस लौटना था, लेकिन शाम तक एक ही बस पहुंची।
बाकी बसों का कोई पता नहीं था। शाम को बच्चों को लेने पेरेंट्स स्कूल पहुंच चुके थे, लेकिन यहां रात 11.10 तक उनका समय टेंशन में गुजरा। न बसें आ रही थीं और न ही स्कूल के प्रिंसिपल से कोई संपर्क हो रहा था, जो एक बस में ही थे। स्कूल में मौजूद टीचर्स को कुछ पता नहीं था। मौके पर पुलिस भी आई, लेकिन कुछ न कर सकी।
इस दौरान हैरान-परेशान पेरेंट्स यही कहते सुने गए कि बच्चे कहां हैं, अब तक क्यों नहीं आए, कहीं कुछ हो तो नहीं गया, देरी की वजह क्या है? लेकिन उन्हें इन सवालों का कोई जवाब नहीं मिल रहा था और परेशानी बढ़ती जा रही थी। स्कूल प्रशासन ने शनिवार को बच्चों के लिए मोरनी का ट्रिप रखा था।
अभिभावकों के मुताबिक बसे सुबह 7 बजे जानी थीं, लेकिन 9 बजे गईं। बच्चों को मोरनी से काफी पहले उतार दिया गया। उन्हें बताया गया कि सड़क छोटी है और बसें आगे नहीं जा सकतीं। कुछ बच्चे कार, ट्रक में लिफ्ट लेकर या पैदल ही मोरनी तक पहुंचे।
क्या है देरी की वजह
एक बच्चे से जब देरी की वजह पूछी तो उसने बताया कि बस खराब हो गई थी.. तभी उसके साथी ने कहा ये झूठ बोल रहा है, बस खराब नहीं हुई, कुछ और वजह थी.. तभी बच्चे की मां और टीचर आ गईं। इन्होंने बच्चे को कुछ और बताने से रोक दिया। मां ने कहा कि वह नहीं चाहतीं बच्चे का नाम सामने आए।
पहुंचना था छह बजे
टी चर वंदना चड्ढा ने बताया कि तीसरी से 10वीं तक के बच्चों को शाम छह बजे तक लौटना था। एक को छोड़कर बाकी बसें न लौटीं तो उन्होंने 6.30 बजे साथ गए स्टाफ से संपर्क किया। बताया गया कि वह मोरनी से निकलने लगे हैं। 10 बजे दूसरी और 10.20 पर तीसरी बस पहुंची। बाकी बसें रात 11.10 पर पहुंचीं।
अनसुलझे सवाल
> मोरनी के रास्ते पर बसें चल सकती हैं तो विद्यार्थियों को पहले क्यों उतारा गया?
> विद्यार्थियों के साथ गए स्कूल टीचर्स ने स्कूल में संपर्क कर यह क्यों नहीं बताया कि वह देरी से पहुंच रहे हैं?
> मोरनी का रास्ता करीब डेढ़ घंटे का है तो आने-जाने में इतना वक्त क्यों लगा?
"एक बस के स्पीड गवर्नर में आग लग गई थी, उसके बाद एक अन्य बस के टैंक से इंजन तक डीजल नहीं पहुंच रहा था, कहीं से डीजल मंगवाकर बस में डाला गया। पहाड़ पर चढ़ाई के समय कुछ बच्चों की तबीयत भी बिगड़ गई थी।"
विंग कमांडर आर चड्ढा, प्रिंसिपल शिशु निकेतन पब्लिक स्कूल-43