नई दिल्ली. जयपुर के सीतापुरा स्थित इंडियन ऑयल डिपो में लगी आग के मामले में पहली गाज ट्रर्मिनल इंचार्ज पर गिरी है। पेट्रोलियम राज्यमंत्री जितिन प्रसाद के आदेश पर टर्मिनल इंचार्ज गौतम बोस को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है। साथ ही देश भर में घनी आबादी में स्थित तेल डिपो को हटाने की कवायद भी शुरू कर दी गई है। सभी तेल कंपनियों के प्रतिष्ठानों को दिसंबर अंत तक सेफ्टी और सिक्योरिटी ऑडिट कराने का भी आदेश दिया गया है।
सीतापुरा में लगी आग के संबंध में शनिवार को पेट्रोलियम सचिव व इंडियन ऑयल के सीएमडी (चेयरमैन कम मैनेजिंग डायरेक्टर) सार्थक बेहुरिया के साथ हुई बैठक में प्रसाद ने कहा कि घनी आबादी में स्थित तेल डिपो की सूची तैयार करने के बाद इन्हें तुरंत हटाने की कार्रवाई शुरू की जाए। प्रसाद ने ‘भास्कर’ को बताया कि जयपुर की घटना को एक सबक के तौर पर लिया गया है।
मंत्रालय ने तेल डिपो के अलावा तेल व गैस के ट्रांसपोर्ट सिस्टम का भी सेफ्टी व सिक्योरिटी ऑडिट कराने के निर्देश दिए हैं। ऑडिट से यह पता चल सकेगा कि सेफ्टी व सिक्योरिटी के मामले में कहां कोताही बरती जा रही है। उन्होंने बताया कि मंत्रालय ने देश में मौजूद सभी पेट्रोलियम कंपनियों से कहा है कि वे सेफ्टी से संबंधित अंतरराष्ट्रीय मानदंडों का पालन करने के साथ आपदा प्रबंधन का भी बेहतर इंतजाम करें।
उन्होंने कहा कि बहुत सारे तेल डिपो के मामले सामने आए हैं, जिनके आसपास पहले कोई आबादी नहीं थी। मगर, आबादी बढ़ने के कारण डिपो के आसपास बस्तियां या मोहल्ले बस गए हैं। इस आबादी से डिपो के लिए भी खतरा बढ़ गया है। इस तरह के तमाम डिपो को हटाने की तैयारी जल्द ही शुरू कर दी जाएगी।
देवड़ा ने बुलाई बैठक
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा ने भी देश के तमाम तेल कंपनियों के सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा के लिए बैठक बुलाई है। इस बैठक में सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम, भारत पेट्रोलियम, ओएनजीसी, ऑयल इंडिया के अलावा निजी क्षेत्र की रिलायंस और एस्सार जैसी कंपनियों को भी बुलाया गया है।