नई दिल्ली. देश के चीफ जस्टिस (सीजेआई) केजी बालकृष्णन नीत कॉलेजियम ने केंद्र सरकार को सूचित कर दिया है कि उसने प्रमोशन के लिए कर्नाटक हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस पीडी दिनाकरन के नाम की फिलहाल सिफारिश नहीं करने का फैसला किया है। इससे पहले, जस्टिस दिनाकरन को प्रमोशन देकर सुप्रीम कोर्ट में जज बनाने की चर्चाएं चल रही थीं। उधर, देश के चीफ जस्टिस बालकृष्णन ने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण के अखिल भारतीय सम्मेलन के मौके पर पत्रकारों को बताया, ‘हमने केवल चार अन्य जजों के नाम सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति के लिए आगे बढ़ाने को कहा है।
’ रास्ता साफ
जस्टिस दिनाकरन के बारे में कॉलेजियम के फैसले के साथ ही शीर्ष कोर्ट में विभिन्न हाईकोर्ट के चार मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है। इन जजों में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एके पटनायक, गुजरात के चीफ जस्टिस एस. राधाकृष्ण, पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस तीरथ सिंह ठाकुर तथा कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एसएस निज्जर शामिल हैं।
प्रमोशन नहीं देने की वजह
समझा जाता है कि जस्टिस दिनाकरन का नाम उनके खिलाफ भ्रष्टाचार तथा जमीन अतिक्रमण के आरोपों के मद्देनजर आगे नहीं बढ़ाया गया है। उनका नाम हटने के तब आसार बढ़ गए थे जब पांच प्रख्यात कानूनविदों ने राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, देश के चीफ जस्टिस बालकृष्णन तथा केंद्रीय विधि मंत्री एम वीरप्पा मोइली को पत्र लिखकर आरोपों के मद्देनजर जस्टिस दिनाकरन को प्रमोशन नहीं देने की अपील की थी।
इसके बाद सीजेआई ने सावधानीपूर्वक अनौपचारिक जांच कराई थी। साथ ही, उन्होंने जमीन अतिक्रमण के बारे में तमिलनाडु सरकार से रिपोर्ट मांगी थी। तमिलनाडु स्थित तिरुवल्लूर के कलेक्टर पी. कुमार ने अपनी रिपोर्ट में जस्टिस दिनाकरन के खिलाफ 197 एकड़ जमीन का अतिक्रमण करने के आरोपों की पुष्टि की थी।