Dharm Darshan
देवों की दीपावली
प. जयगोविंद शास्त्� Monday, November 02, 2009 01:38 [IST]  

कार्तिक पूर्णिमा का नाम आते ही हमें भगवान कार्तिकेय का स्मरण होने लगता है। कार्तिकेय भगवान तांत्रिकों और शत्रु संहारक मंत्रों का प्रयोग करने वाले साधकों के परम आराध्य हैं। पूरे कार्तिक मास में भगवान कार्तिकेय की आराधना करके धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष जैसे पुरुषार्थो की प्राप्ति होती है। कार्तिक पूर्णिमा को देवों की दीपावली के रूप में मनाया जाता है। घर के बाहर दीया जलाकर त्रिपुरोत्सव व्रत आदि किया जाता है। स्नान, दान, जप, तप की पूर्णिमा के रूप में यह दिन सर्वश्रेष्ठ है।मोक्ष प्राप्ति और जन्म कुंडली में केंद्र भाव को बलवान करने के लिए इस दिन भगवान मत्स्य का पूजन अति उत्तम रहेगा। इस दिन घर में जहां आप दीयों को जलाएं, वहीं पर एक चौकोर गड्ढा खोदें, इसकी लंबाई, चौड़ाई और गहराई का अनुपात प्रमाण १४ अंगुल का हो। इस गड्ढे को चंदन युक्त जल से सींचे, साथ ही गाय के दूध से इसको भर दें। इसके बाद सोने की आकृति वाली भगवान मत्स्य की मूर्ति डालें, इनकी आंख मोती की बनी हुई हो तो और भी सुंदर है। उसके बाद शुद्ध चित्त से ऊँ महा मत्स्याय नम: मंत्र से भगवान मत्स्य की पूजा-आराधना करें, यह क्षीर सागर दान करने जैसा है।कुंडली में चतुर्थ, अष्टम व द्वादश भाव को मोक्ष कारक माना गया है। चतुर्थ भाव मातृसुख, पारिवारिक शांति, मित्र, मकान, वाहन के सुख का होता है। कार्तिक पूर्णिमा का व्रत इन सबसे वंचित रहे जातकों के लिए परम सुखकारी माना गया है। साथ ही अष्टम भाव के दोष अपयश, अकाल मृत्यु, गुप्त रोग और आरोग्य तथा आयु से संबंधित परेशानियों से छुटकारा दिलाने वाला है। जलतत्व की राशियां ही मोक्षकारककाल पुरुष की कुंडली में चतुर्थ भाव कर्क राशि के जल तत्व का है, जो मोक्षकारक है। अष्टम भाव वृश्चिक राशि का है, जबकि द्वादश भाव मीन राशि का है। यह भी जलतत्व की राशियां हैं, जो मोक्षकारक हैं। इन राशियों के जातकों का दिल पानी की तरह होता है। ये सहज, सरल और मृदुभाषी होते हैं। भगवान मत्स्य की पूजा कष्टों से मुक्ति दिलाकर सांसारिक बंधनों से मुक्त कर देती है। इस दिन भगवान विष्णु को क्षीरसागर दान करने का भी विधान है। वास्तुदोष से मुक्ति पाने का दिनआजकल वास्तु शास्त्र की विद्या पर लोगों का विश्वास बढ़ता जा रहा है। जैसे-जैसे शिक्षा का विकास हो रहा है, वैसे-वैसे लोगों का ज्योतिष और वास्तु पर भी विश्वास बढ़ता जा रहा है। ऐसे में इस दिन घर में भगवान कार्तिकेय की पूजा करते हुए सभी कमरों में दीप जलाएं और पूजा का जल घर के सभी कमरों में छिड़कें, इससे घर की सभी नकारात्मक ऊर्जा बाहर होगी और घर में सुख-शांति का आगमन होगा। भूत-प्रेत, बाधा, तारण, मोहन, उच्चटन, विद्वेषण आदि तांत्रिक कर्मो से परेशान जातक इस दिन भगवान कार्तिकेय की पूजा करके मुक्ति पा सकते हैं। आज के दिन ‘वृषोत्सर्ग तथा भक्तव्रत’ का भी विधान है। ‘वृषोत्सर्ग’ से कुंडली में पितृशाप दोष शांत हो जाता है और जातक को रुद्रलोक की प्राप्ति होती है। अत: आप कह सकते हैं कि कार्तिक पूर्णिमा वर्ष की श्रेष्ठ पूर्णिमाओं में से एक है।जन्म कुंडली में चतुर्थ, अष्टम और द्वादश भाव को मोक्ष कारक माना गया है। चतुर्थ भाव मातृसुख, पारिवारिक शांति, मित्र, मकान, वाहन के सुख का होता है। कार्तिक पूर्णिमा का व्रत इन सबसे वंचित रहे जातकों के लिए परम सुखकारी माना गया है। साथ ही अष्टम भाव के दोष से संबंधित परेशानियों से छुटकारा दिलाने वाला है।

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