राजकुमार संतोषी और विपुल शाह के काम करने की शैली बिल्कुल जुदा है। ‘लंदन ड्रीम्स’ को पहले संतोषी बनाने वाले थे और उनका संस्करण शाह की प्रस्तुति से निश्चित ही अलग होता।रा जकुमार संतोषी की रणबीर कपूर और कैटरीना कैफ अभिनीत ‘अजब प्रेम की गजब कहानी’ इस शुक्रवार को प्रदर्शित होने जा रही है। ज्ञातव्य है कि कुछ वर्ष पूर्व राजकुमार संतोषी सलमान खान और अजय देवगन के साथ ‘लंदन ड्रीम्स’ बनाने वाले थे और उन्होंने फिल्म का मुहूर्त स्वर्ण मंदिर, अमृतसर में किया था। ‘अमेडियस’ का भारतीयकरण उन्हीं का विचार था और पटकथा पर काम करने तथा लोकेशन देखने वह लंदन भी गए थे। उन्हीं दिनों सलमान खान ने संतोषी से ‘रामायण’ के भव्य फिल्मीकरण की बात भी की थी। संतोषी महोदय ने अजय और काजोल के साथ ‘रामायण’ बनाने की घोषणा भी की थी, परंतु उनकी ‘लज्जा’ इत्यादि फिल्मों की असफलता के कारण कुछ भी संभव नहीं हो पाया।
संतोषी की धीमी गति और अन्य कारणों के चलते ‘लंदन ड्रीम्स’ रद्द हो गई और निर्माता सलमान खान के घर चक्कर लगाता रहा। उसके तथाकथित तौर पर डूबे हुए धन के कारण सलमान खान ने विपुल शाह के साथ फिल्म को पुन: पटरी पर बिठाया। अब यह बताना कठिन है कि संतोषी ने जो कुछ भी लिखा था, वह निर्माता के मार्फत विपुल शाह के पास पहुंचा या उन्होंने अपने लेखक के साथ मिलकर ‘अमेडियस’ की प्रेरणा से हाल में प्रदर्शित फिल्म लिखी।
बहरहाल यह तय है कि संतोषी का संस्करण ‘अमेडियस’ के अधिक निकट होता। संतोषी और शाह की शैलियां बिल्कुल जुदा हैं। संतोषी ने सलमान और आमिर खान के साथ सफल हास्य फिल्म ‘अंदाज अपना अपना’ बनाई थी और उसमें सलमान के लिए रचे गए पात्र का ही स्वाभाविक अगला रूप ‘लंदन ड्रीम्स’ में प्रस्तुत सलमान का पात्र है। हो सकता है कि ‘रामायण’ पर हुई चर्चा के समय कदाचित हनुमान चालीसा के प्रयोग की बात भी हुई हो।
इतना ही नहीं, ‘लज्जा’ में प्रस्तुत अजय देवगन ‘लंदन ड्रीम्स’ में भी कुछ हद तक वही तेवर दिखाते हैं, परंतु यह पात्र अमेडियस में प्रस्तुत पात्र सेलेरी की प्रेरणा से संचालित है। संतोषी ने पुणो फिल्म संस्थान से फिल्म के सारे शास्त्रीय पक्ष सीखे हैं और विपुल शाह गुजराती नाटक करते-करते फिल्मों में आए हैं और उनका दृष्टिकोण व्यवहारिकता का है और बॉक्स ऑफिस सफलता साधने की गंभीर कोशिश भी वह हमेशा करते आए हैं।
संतोषी का संस्करण शाह की प्रस्तुति से निश्चित ही अलग होता। यहां बात बेहतर या कमतर की नहीं हो रही है, वरन दृष्टिकोण और शैलियों के अंतर की हो रही है। संतोषी ने अपने प्रारंभिक दौर में ‘घायल’, ‘घातक’, ‘दामिनी’ और ‘अंदाज अपना अपना’ जैसी विराट सफलताएं रचीं और बाद में वह पटरी से उतर गए। विपुल शाह ने भी ‘वक्त’, ‘नमस्ते लंदन’ इत्यादि सफल फिल्में रची हैं, परंतु उनकी फिल्मों की बराबरी नहीं कर सकती और यह भी सच है कि शाह ने संतोषी की विफल फिल्मों की तरह भीषण घाटे वाली कोई फिल्म नहीं रची है।संतोषी ‘अमेडियस’ का महत्वपूर्ण दृश्य जरूर लेते।
असिन को अजय का षड्यंत्र मालूम पड़ता है और वह उसके जुनून और ताकत को जानती हैं। वह अजय से कहती हैं कि स्वयं उन्हें समर्पित करने के लिए तैयार है, परंतु उन्हें सलमान पर कोई आक्रमण नहीं करना चाहिए। समझौते स्वरूप वह स्वयं को समर्पित कर रही हैं।अजय कहते हैं कि वह सलमान को नष्ट करके ईश्वर को हानि पहुंचाना चाहते हैं, जिसने प्रतिभा उन्हें दी और महत्वाकांक्षी सपने अजय को। बहरहाल सलमान और अजय के अभिनय के लिए ‘लंदन ड्रीम्स’ सराही जा सकती है।