चंडीगढ़. निर्माणाधीन अदालती कॉम्पलेक्स के लिए पैसा जारी न करने पर इसी हफ्ते पंजाब सरकार को पड़ी फटकार के बाद अब लगाता है कि सिंचाई विभाग को भी अदालत की फटकार पड़ना यकीनी है। हालांकि इसके लिए सिंचाई विभाग नहीं, वित्त विभाग जिम्मेदार है।
विभाग ने राज्य के कई जिलों में नहरें बनाने का काम चला रखा है। ठेकेदारों का करोड़ों रुपया खर्च हो चुका है, लेकिन खजाने से उनके बिल क्लीयर नहीं हो रहे हैं। यह सरकार के उन दावों की भी पोल खुलने का एक उदाहरण है जिसमें दावा किया जा रहा है कि डेढ़ साल पुराने नहरी सिस्टम को बदलने में अकाली भाजपा सरकार ने ही काम किया है।
वित्त विभाग के प्रमुख सचिव करण अवतार सिंह को सिंचाई विभाग के प्रमुख सचिव सुरेश कुमार का एक पत्र भी पिछले दिनों मिला है। इसमें उन्होंने बताया है कि 51.17 करोड़ रुपए के काम हो चुके हैं, लेकिन विभिन्न जिला खजाना कार्यालयों से बिल क्लीयर नहीं किए जा रहे हैं जिसके चलते ठेकेदारों को हाईकोर्ट का सहारा लेना पड़ा रहा है। यह बादल सरकार के लिए भी शर्मिदगी वाली स्थिति है। वित्त विभाग के अफसरों का यह भी कहना है कि ऐसा केवल सिंचाई विभाग के अफसरों के साथ ही नहीं हो रहा है बल्कि और भी कई विभागों के ठेकेदारों को इसी तरह की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
दिलचस्प बात यह है कि ये वे प्रोजेक्ट हैं जिन्हें बजट में मंजूरी मिली हुई है। बजट में राशि रखने के बावजूद बिल क्लीयर न होने से ठेकेदारों ने काम बंद करना शुरू कर दिया है। विभागीय इंजीनियर्स का तो यह भी मानना है कि अच्छी कंपनियों के ठेकेदारों ने काम में दिलचस्पी लेना अब बंद कर दिया है।
ज्ञात हो कि इससे पहले पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस तीर्थ सिंह ठाकुर भी राज्य सरकार को जिला अदालतों के लंबित कामों के लिए फटकार लगा चुके हैं। उनका तो यहां तक कहना है कि यदि वित्तीय स्थिति इतनी खराब है तो मंत्रियां और राज्य के उच्च अधिकारियों के खर्चे कैसे पूरे हो रहे हैं।
वित्तीय कमेटी नहीं ले सकी कोई फैसला
वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल और उद्योग मंत्री मनोरंजन कालिया की बनी कमेटी सवा महीना बीत जाने के बावजूद कोई फैसला नहीं ले सकी। लिहाजा, विकास योजनाओं के कई काम अधर में लटकते जा रहे हैं। वित्त अधिकारी भी वित्तीय कमेटी की रिपोर्ट के बाद हालत सुधारने के बारे बताकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं।