चंडीगढ़. पिछले डेढ़ साल से पीयू को सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा दिलाने की जद्दोजहद प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के सामने भावनात्मक रूप से सामने आएगी। तीन नवंबर को प्रधानमंत्री का दौरा पीयू को नई दिशा देने में मदद कर सकता है। प्रधानमंत्री के इस दौरे के दौरान शिक्षक और विद्यार्थी पीयू के अतीत का वास्ता देकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा मांगेंगे।
पीयू के एल्यूमनी डॉ. मनमोहन सिंह से यूनिवर्सिटी के राष्ट्रीय महत्व को सामने रखते हुए सेंट्रल यूनिवर्सिटी के दर्जे की मांग रखी जाएगी। आजादी के पहले से उत्तर भारत में शिक्षा का मुख्य केंद्र रही पीयू को अब देश के इस हिस्से का प्रतिनिधित्व करने का रुतबा दिलाने की खातिर शिक्षक और विद्यार्थी अपने स्तर पर तैयारी कर रहे हैं। सेंट्रल यूनिवर्सिटी के आंदोलन की अगुआई कर रही पीयू टीचर एसोसिएशन (पुटा) पंजाब की वित्तीय स्थिति और पीयू के प्रति उत्तरदायित्व की मौजूदा तस्वीर ज्ञापन के माध्यम से प्रधानमंत्री के सामने रखेगी।
दरअसल, पीयू के मौजूदा स्टेटस को देखते हुए सेंट्रल यूनिवर्सिटी देने में कोई हर्ज नहीं है। पीयू के चांसलर उप राष्ट्रपति हैं और पीयू का गठन ही पार्लियामेंट एक्ट के तहत हुआ है। पुटा इसी को आधार बनाकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के मसले को प्रधानमंत्री के सामने रखेगी।
पुटा महासचिव डॉ. अक्षय कुमार कहते हैं कि पंजाब सरकार अपनी वित्तीय स्थिति की वजह से पीयू के प्रति अपने दायित्वों का निर्वाह करने में अस्मर्थ है। लिहाजा, तमाम राजनीतिक मुद्दों को भुलाकर पीयू को सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा दिया जाना वक्त की जरूरत है। सोपू नेता वरिंद्र सिंह ढिल्लों कहते हैं कि अब सीधे प्रधानमंत्री से ही इस मसले पर बात करना सार्थक होगा। इस मसले से जुड़े तमाम तथ्यों को प्रधानमंत्री के सामने रखना होगा।