चंडीगढ़. पंजाब यूनिवर्सिटी की ओर से राइट टू इन्फॉर्मेशन (आरटीआई) एक्ट के तहत सूचना देने के लिए 12 लाख रुपए मांगने की शिकायत सेंट्रल इन्फॉर्मेशन कमिश्नर (सीआईसी) से की गई है। पीयू के एलएलएम के विद्यार्थी वरुण मलिक से आरटीआई के तहत जवाब के लिए दिए जाने वाले कागजों के बदले में पीयू ने यह रकम जमा कराने को कहा है। यह मामला सामने आने के बाद शहर के आरटीआई कार्यकर्ता आरके गर्ग ने इसकी शिकायत सीआईसी में की है।
गर्ग ने इसमें कहा है कि पीयू के सेंट्रल पब्लिक इन्फॉर्मेनर कमिश्नर का इस तरह 12 लाख रुपए मांगना आवेदक को हतोत्साहित करने का प्रयास है। गर्ग ने उन्होंने शिकायत में आरोप लगाया है कि पीयू पहले भी कई बार आरटीआई आवेदकों को तय अवधि और सही समय पर सही जानकारी देने से बचता रहा है। उन्होंने सीआईसी से इस मसले में पीयू पर कार्रवाई करने की मांग की है ताकि भविष्य में आरटीआई आवेदकों को जवाब मिल सके।
पीयू के विद्यार्थी वरुण मलिक ने हॉस्टलों में विद्यार्थियों से वसूले जाने वाले विभिन्न शुल्क से संबंधित जानकारी मांगी थी। मलिक की ओर से पूछे गए 19 सवालों में पिछले पांच साल में वसूले गए शुल्क और उसके खर्चे की जानकारी मांगी थी। लेकिन पीयू ने संबंधित जानकारी देने से पहले वरुण से 12 लाख 33 हजार रुपए मांगे हैं। पीयू का तर्क है कि इसके लिए पीयू को 6 लाख से ज्यादा पेज तैयार करने पड़े हैं और इनका खर्चा 12 लाख से ज्यादा है।
जानकारी छिपाने की कोशिश
यह सरासर छात्र से जानकारी छिपाने की कोशिश है। कोई भी जानकारी देने के लिए 6 लाख पेज नहीं हो सकते और जिनकी कीमत इतनी ज्यादा हो। ऐसा मेरे साथ भी हुआ है। मैंने कहा था कि मैं धन देने को तैयार हूं, पर जानकारी लेने से पहले मैं पेज देखना चाहता हूं ताकि जो उपयोगी पेज हों, उन्हें ले सकूं। इस छात्र को भी आरटीआई में दिए गए इस प्रावधान का इस्तेमाल करते हुए पहले पेज देखने चाहिए और जो उपयोगी हैं, वही पेज लिए जाएं।
आरके गर्ग, आरटीआई विशेषज्ञ