चंडीगढ़. अज्ज बंदा मारन नूं चित्त करदा.., पहलां बोली दा नी फेर पिछ्छे हटीदा नी, जदों पंगा पै जावे.., सहित हिंसक प्रवृत्ति को दर्शाते अनेक पंजाबी गीत पंजाबी सभ्याचार को कहां ले जा रहे हैं? उपरोक्त दोनों गीत हरजीत हरमन की कैसेट ‘हूर’ व दिलजीत की कैसेट ‘नेक्सट लेवल’ के हैं।
इससे न सिर्फ समझदार श्रोता बल्कि पुरातन पंजाबी संस्कृति से जुड़े गायक व गीतकार भी निराश हैं। इनकी निराशा सही भी है क्योंकि उन्हें यह समझ नहीं आ रहा कि आखिर ये गीत हमारी युवा पीढ़ी को क्या संदेश देते हैं। यह पहली बार नहीं कि दुनिया भर में अपने गीत संगीत से अलग पहचान बना चुके अमीर पंजाबी सभ्याचार के गीतों पर उंगली उठी हो। इससे पहले भी ‘चक्कलो रिवाल्वर रफल्लां बई कब्जा लेणा ऐ, होया की जे करने शिकार छड्ड ते रफल चलाणी तांनी जट्ट भुल्लिया’ सहित अनेक गीत इसी पंक्ति के रहे हैं।
हथियार रखने वाले को गोली लगने की संभावना अधिक: वहीं दूसरी तरफ एक शोध में वैज्ञानिकों ने पाया है कि हथियार रखने वाले व्यक्ति को किसी हमले की स्थिति में गोली लगने की आशंका उन लोगों के मुकाबले साढ़े चार गुना ज्यादा होती है, जिनके पास हथियार नहीं होता। अपने तरह के पहले अध्ययन में यूनिवर्सिटी ऑफ पैनसिल्वेनिया स्कूल ऑफ मेडिसन रोग वैज्ञानिकों ने यह नतीजा निकाला है।
संगीत बना कारोबार
आज संगीत कारोबार बन गया है। इसमें क्रिएटिविटी कम व व्यापार अधिक है। इसी का परिणाम है कि आज हमारे गीतों में हिंसक प्रवृत्ति भारी हो गई है। इसके खिलाफ हमें एक लहर चलानी होगी। मेरा गायकों व गीतकार भाइयों से निवेदन है कि वे अमीर पंजाबी सभ्याचार को बढ़ावा देने वाले गीतों की रचना करने के साथ मोहब्बत के गीत गाएं।
हंस राज हंस राज गायक, पंजाब
युवाओं को हथियार थमाने पर आमादा
आज अनेक पंजाबी गीतकार व गायक राज्य के युवाओं के हाथ में हथियार थमाने पर आमदा हैं। ये युवा पीढ़ी को खूंखार बनाने में लगे हैं। आज के गीतों ने पंजाबी सभ्याचार को जितनी चोट पहुंचाई है, उससे सभ्याचार तार तार हो रहा है। मेरी गायकों व गीतकारों से अपील है कि वे इस तरफ ध्यान देकर युवाओं के हाथ में हथियार न थमाएं।
देव थरीके वाला विख्यात पंजाबी गीतकार
मनोरंजन के लिए गाया गीत
मैंने तो यह गीत मनोरंजन करने के उद्देश्य से गाया है। मेरा इरादा हिंसक प्रवृत्ति को बढ़ावा देने का कतई नहीं है।
दिलजीत गायक ‘नेक्सट लेवल’
गीत नहीं लगता हिंसक
मुझे गीत की शब्दावली में कोई बुराई दिखाई नहीं देती। असल में यह समाज के भ्रष्ट तंत्र पर एक करारी चोट है जिसमें नायक भ्रष्टाचारियों को ठीक करने के लिए सोचता है।
हरजीत हरमन हूर कैसेट के गायक