Monday, November 02, 2009 03:39 [IST]  

danik bhaskar100 घंटे बाद भी धधकते रहे टैंक

Bhaskar News

Fireजयपुर.इंडियन ऑयल टर्मिनल में आगजनी के सौ घंटे बीत जाने के बाद भी रविवार देर रात पांच टैंक धधक रहे थे। हालांकि विशेषज्ञ मान रहे हैं कि सोमवार को कभी आग बुझ सकती है, लेकिन रविवार रात अचानक धमाकों ने फिर सबको भयभीत कर दिया। सुबह भी नजदीक स्थित एलपीजी बॉटलिंग प्लांट से सायरन बजने की आवाज आई थी, लेकिन काफी धीमी थी।

बाद में पता चला कि किसी पाइपलाइन में वॉल्व से पानी का फव्वारा छूटा था। सुबह ही टैंकों की लपटें अचानक भभकीं और गुबार जीनस कंपनी के ऊपरी हिस्से तक पहुंच गया। एहतियात के तौर पर कई अगिAशमन वाहन यहां खड़े कर दिए गए।रविवार रात तक धधक रहे टैंकों की स्थिति के लिए भी कयास लगाए जाते रहे हैं कि संभवत: सोमवार दोपहर बाद तक शांत होंगे। हालांकि सुनिश्चित कुछ नहीं है। कब बुझेंगे, बस इंतजार है। रविवार को 3 शव और निकाले गए।

दो टर्मिनल से, जो वहीं के कर्मचारियों के थे। एक जीनस कंपनी भवन के मलबे से। अब तक 11 शवों में से दस की शिनाख्त हो गई। हादसे में 100 प्रतिशत जल चुके जगदीश की रविवार देर शाम अस्पताल में मौत हो गई। उधर, आग की कवरेज कर रहे मीडियाकर्मियों पर भी पुलिस ने बल प्रयोग किया।आग के बीच सीतापुरा औद्योगिक क्षेत्र में सन्नाटा बरकरार है। रविवार दिनभर 5 टैंकों से निकल रही ज्वाला धुएं के गुबार के साथ आसमान छूती रही। सेना, पुलिस और एसटीएफ के जवानों की पोजिशन में रविवार को कोई बदलाव नजर नहीं आया। जामनगर रिफाइनरी से एस्सार ऑयल से नीरज दुबे व संजय लूथरा सहित चार अधिकारियों की टीम जयपुर पहुंची। उसने स्थितियों का जायजा लिया। तेल कंपनी के अधिकारियों, फायर अधिकारियों तथा जिला प्रशासन से बात कर वे भी आग स्वत: बुझेगी, इसी प्रतीक्षा में लग गए।.

विशेषज्ञों ने आग बुझाने का प्रयास खतरनाक माना था

कलेक्टर कुलदीप रांका ने बताया कि तकनीकी विशेषज्ञों ने फिलहाल आग बुझाने का प्रयास ज्यादा खतरनाक माना है। इससे दिक्कत कम होने के बजाय बढ़ सकती है। इसको देखते हुए आग बुझाने के लिए कैंपस में फिलहाल कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। टैंक फटने की एक फीसदी संभावना है। इसको देखते हुए डिपो के चारों ओर खाई खोद दी है ताकि जमीन पर आग फैले नहीं। इसके साथ ही एक किलोमीटर दायरे को फिलहाल प्रतिबंधित किया गया है। शेष क्षेत्र में लोग सुरक्षा उपाय करने के बाद रह सकते हैं, लेकिन फैक्ट्रियों में फिलहाल उत्पादन शुरू नहीं किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि जीनस फैक्ट्री व आईओसी का एक-एक कर्मचारी अभी भी लापता बताया गया है। क्षेत्र की सुरक्षा व चोरियों की शिकायतों के बाद 250 होमगार्ड के जवान व 3 पुलिस कंपनियां लगाई गई हं। कलेक्टर ने बताया कि प्रदूषण से सांस व एलर्जी की बीमारियों की आशंका को देखते हुए मेडिकल की मोबाइल टीमों का गठन किया है। जो घर-घर जाकर लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण करेंगी।

व्यक्ति की जान अहम 

जामनगर से एस्सार ऑयल कंपनी के विशेषज्ञ चार सदस्यीय दल ने रविवार को आग से बर्बाद हुए आईओसी टर्मिनल का मौका देखा। दल के सदस्य नीरज दुबे व उनके साथियों ने बताया कि हमने स्थितियों को देखा है लेकिन फिलहाल केंद्रीय मंत्रालय ने जो निर्णय किया है, वह सबकी राय के साथ किया है कि इसकी आग को स्वत: ही बुझने दिया जाए।

यदि इसे बुझाने का प्रयास किया जाता तो संभवत

आग तो बुझ सकती थी लेकिन उससे कोई बड़ी दुर्घटना का अंदेशा भी बन सकता था। हम करोड़ों रुपए बचाने की अपेक्षा एक व्यक्ति की जान महत्वपूर्ण मानते हैं।

अधिकतर मकान व फैक्ट्रियां ठीक 

आईओसी डिपो अग्निकांड से क्षतिग्रस्त हुए आसपास के अधिकांश मकानों व फैक्ट्रियों को तकनीकी टीम ने क्लीन चीट देते हुए रहने लायक बताया है। पहले दिन का सर्वे रविवार को किया गया, जिसमें केवल चार मकानों और 30 फैक्ट्रियों में से 3 को रहने लायक नहीं माना गया। यह सर्वे आईओसी डिपो के 500 मीटर दायरे से बाहर किया गया है। प्रभावित क्षेत्र में सर्वे आग पूरी तक बुझने के बाद ही होगा। आग से प्रभावित इलाके के भवनों की जांच करने के लिए जिला प्रशासन ने जेडीए, पीडब्ल्यूडी व रीको के इंजीनियरों की तीन टीम बनाई थी, जिसने सुखपुरिया, चतरावाला, श्योपुर रिहायशी क्षेत्र, दहलावाला ढाणी, सुखदेवपुरा, गोविंदपुरा, सदर थाने के आसपास के क्षेत्र का सर्वे किया। टीम के इंचार्ज व पीडब्ल्यूडी के अधीक्षण अभियंता आरएन बियाणी ने बताया कि पहले दिन के सर्वे में 3 फैक्ट्रियों व 5 मकानों को छोड़कर शेष सभी रहने लायक है। हालांकि कुछ अन्य इमारतों में दरारे आई हैं, लेकिन उनकी छत खराब नहीं हुई है। कुछ मकानों में पत्थर की पट्टियां होने से वे रहने लायक नहीं है। शेष का सर्वे किया जा रहा है।

सीतापुरा पुल भी सुरक्षित 

तकनीकी टीम ने सीतापुरा पुलिया को भी उपयोग में लेने लायक व सुरक्षित बताया है। आग बुझने के बाद इस पुलिया को आवागमन के लिए खोल दिया जाएगा। पुलिया की जांच करने करने के लिए जेडीए के अतिरिक्त मुख्य अभियंता की अध्यक्षता में छह सदस्यीय टीम लगाई थी।

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विचार:

Dinesh Kumar Upadhyay

Monday, 2nd Nov 2009, 6:52
govt. should take out of such kind of dipot away at least 20-25 K.M away from residential area.as in future such kind of thing may happend anywhere at any time.like this(jaipur)and also govt.should help and provide house,money to those people who lost there home and lots of thing in this incident

anmol kasliwal

Monday, 2nd Nov 2009, 13:33
we are very sad that the people were died .we hope that there will be no spot in the future

prateek jain

Monday, 2nd Nov 2009, 13:41
in past there is bomb spot in jaipur & in many cities. in present there is again a IOC spot. i hope that god will bless them, who were died and there familer will give lots of money for this accident& thanks for people who give them best wishes.

Lav Kishore Barman

Monday, 2nd Nov 2009, 14:05
the administration is not allowing even the factory owners to give tea, milk and food to the persons who are taking care of the premises. And passes should have been given to the factory owners, to visit and check their premises.

gautam borawat

Monday, 2nd Nov 2009, 16:05
jaipur me ki gai rajasthan me sabse badi laparwahi thi or aisa kabhi na ho eskeliye pura dhyan rakhana chahiy

Kuldeep Singh

Monday, 2nd Nov 2009, 19:40
With the fire at Indian Oil Terminal in Sitapura Industrial Area, Sanganer, Jaipur, there has been lot of carbon emission in the air for the last 5 days and it will continue to be in the air for quite a no. of days. Whether Rajasthan Pollution Control Board taken samples of the air in different areas of the city to identify the contents of Carbon, Sulphur, Nitrogen etc in the air

sandeep sharma

Tuesday, 3rd Nov 2009, 18:49
es aag ne prasashan ke intezam ke pool khol de hai, ghambhir soch wale baat yah hai ke agar rajdhani mai es tarah ke intazam hai to dusari jagah kya estati hogi, mai to sirf yah batana chahata hun ki ioc jaise khatarnak jagah per suraksa ki yah estati hai to phir aam adami ke suraksha ki kya halat hai?

mukesh saini

Wednesday, 4th Nov 2009, 1:53
ioc or such kind of oil companies must make securty systems

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