
जोधपुर. शहर के सिरमौर उद्योग में शुमार हस्तशिल्प को इन दिनों सहारे की दरकार है। पिछले कुछ वर्षो से लगातार घटते निर्यात ने इस उद्योग की चूलें हिला दी हैं। इस स्थिति से निजात पाने के लिए यदि कारगर कदम नहीं उठाए गए तो निर्यात और भी घट सकता है।
पिछले तीन वर्षो के दौरान हस्तशिल्प के निर्यात में लगभग 700 करोड़ की कमी आई है। हालात नहीं सुधरे तो इस बार फिर ऐसी ही कहानी दोहराए जाने की आशंका है। शहर के तीनों कंटेनर डिपो के आंकड़ों पर नजर डालने पर इसकी पुष्टि होती है। विदेश जाने वाले कंटेनर की संख्या पिछले वर्ष की तुलना में करीब 20 फीसदी कम हो गई है।
डॉलर के भाव में लगातार उतार चढ़ाव के साथ लोहे के भावों में फिर वृद्धि होना इसका मूल कारण माना जा रहा है। निर्यातकांे का कहना है कि सरकार को शीघ्र ही इस मामले में विचार करते हुए हस्तशिल्प निर्यातकों के लिए कोई खास पैकेज घोषित करना चाहिए। तीन वर्ष पहले जोधपुर का हस्तशिल्प निर्यात करीब 1500 करोड़ था।
एक वर्ष बाद यह घट कर करीब 1200 करोड़ और वर्ष 2008 -09 में और भी घट कर करीब 800 करोड़ रुपए तक आ गया। वर्ष 2008 से अप्रैल से सितंबर तक जोधपुर के तीनों कंटेनर डिपो से रवाना होने वाले हस्तशिल्प उत्पादों के कंटेनर्स की संख्या 12166 थी। चालू वर्ष में इसी अवधि के दौरान यह संख्या घट कर 9941 रह गई। इस दौरान निर्यात भी करीब 20 फीसदी घट गया है।
रुपया मजबूत, डॉलर कमजोर : निर्यातकों का हर सौदा डॉलर के भावों में होता है। रुपया मजबूत होने से डॉलर के भाव घट रहे है। इसके चलते जिस भाव में पहले सौदा हो चुका है उस भाव में देने पर निर्यातकों को घाटा हो रहा है।
धीरे- धीरे उबर रहा है अमेरिका : जोधपुर से होने वाले निर्यात का 60 फीसदी हस्तशिल्प उत्पाद अमेरिका जाता है। हालांकि अमेरिका मंदी से उबरने लगा है लेकिन अभी भी वहां जाने वाले हस्तशिल्प उत्पादों की मात्रा में कोई बढ़ोतरी नजर नहीं आ रही है।
लोहे व लकड़ी के भाव बढ़े : जोधपुर से 55 प्रतिशत लकड़ी व 35 प्रतिशत लोहे के उत्पाद निर्यात होते है। लोहे व लकड़ी के भाव भी करीब 10 फीसदी तक बढ़ गए है। लेकिन मंदी की मार से उबर रहे देश के बायर्स भाव बढ़ाने की स्थिति में नहीं है।
नरेगा की भी मार : हस्तशिल्प निर्यातकों का कहना है कि नरेगा योजना में एक वर्ष में 100 दिन तक तो श्रमिकों को 4 घंटे काम करने के 100 रुपए दिए जा रहे हैं। इसकी वजह से श्रमिकों की कारखानों में रुचि घट गई है।
आयकर अधिनियम 10बीए की समाप्ति का दुष्प्रभाव : पूर्व में निर्यातकों को आयकर अधिनियम 10बीए के तहत आयकर में छूट दी जा रही थी। हाल ही में सरकार ने यह छूट समाप्त कर दी है। इसका भी निर्यात पर विपरीत प्रभाव देखा जा रहा है।