वायरसों का मिश्रण है एएच1एन1
भास्कर न्यूज Monday, November 02, 2009 05:05 [IST]
जोधपुर. एएच1एन1 वायरस ह्यूमन इंफ्लुएंजा सहित कई वायरसों का मिश्रण है। लेकिन बोलचाल की भाषा में इसे स्वाइन फ्लू का नाम दे दिया गया है। इस वायरस के वर्तमान स्वरूप में स्वाइन, एविअन सहित कई दूसरे वायरस शामिल हैं। यह बात शनिवार को मेडिसिन अपडेट 2009 में अमेरिका के जॉन हॉफकिन इंस्टीट्यूट, बाल्टीमोर की डॉ. गीता सिन्हा ने कही। डॉ. सिन्हा ने कहा कि एएच1एन1 पिछले छह दशक में कई रूप में सामने आया है। हर बार इस वायरस की प्रकृति अलग होती है। अमेरिका में इसका व्यापक प्रभाव सामने आ चुका है। हालांकि वहां समय रहते इस पर नियंत्रण कर लिया गया, लेकिन इस दौरान कई जानें जा चुकी थीं।फर्क नहीं है लक्षणों में : डॉ. सिन्हा ने अमेरिका में स्वाइन फ्लू की वर्तमान स्थिति पर चर्चा करते हुए कहा कि भारत के रोगियों व अमेरिका के रोगियों के लक्षणों में कोई खास फर्क नहीं है। लेकिन वहां जागरूकता के चलते लोग जल्दी उपचार से जुड़ जाते हैं। उन्होंने कहा कि फ्लू के रोगी के उपचार में सभी जगह टेमी फ्लू काम में ली जा रही है। अमेरिका ने इस दिशा में तेजी से काम कर वैक्सीन विकसित कर उसका उपयोग शुरू कर दिया।दूसरे रोग बढ़ाते है परेशानी : डॉ. सिन्हा ने कहा कि एएच1एन1 वायरस का जीवनकाल सात दिन का होता है। ऐसे में समय रहते उपचार से जुड़ने वाले रोगियों का इलाज शत प्रतिशत होने की सम्भावना रहती है। पहले से ही दूसरी बीमारियों से पीड़ित रोगियों में इसकी सम्भावना कम होती है। ऐसे रोगियों के शरीर में इम्युनिटी घटने से दवाओं का असर नहीं होता।एंटीबायोटिक्स पर हो नियंत्रण : डॉ. गीता ने कहा कि अमेरिका में एंटीबायोटिक्स के उपयोग के लिए कई मापदण्ड निर्धारित हैं। भारत में इस तरह के नियमों का अभाव है। एंटीबायोटिक्स का अंधाधुंध उपयोग सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। नॉको के डॉ. बीबी रेबारी ने कहा कि देश में 2.8 लाख लोग एआरटी पर हैं। वर्ष 2016 तक संख्या बढ़ने से ऐसे रोगियों का उपचार सामान्य रोगियों के साथ होने की बात कही। इसके लिए डॉक्टर्स को मानसिक रूप से तैयार रहना चाहिए।