मुंबई.
फिल्म : अबोहोमान
निर्देशक :रितुपर्णो घोष
कलाकार :दिपाकंर डे, जिसे सेनगुप्ता, अनन्या चटर्जी, रिया सेन
सिनेमा : बंगाली सिनेमा
बंगाली सिनेमा के जाने माने फिल्म निर्देशक रितुपर्णो घोष की फिल्म अबोहमान एक फिल्म निर्देशक और एक युवा अभिनेत्री के बीच उपजे प्यार के सनसनीखेज संबंधों की कहानी है। सिनेमा के अंदर का सिनेमा जब बुना जाता है तो उसके आसपास और अतीत की बहुत सी बातों को कुरेदा जाता है। फिल्म के माध्यम से एक ऐसे ही सच को तलाश करने का प्रयास फिल्म निर्देशक ने किया है।
फिल्म निर्देशक अनिकेत, उसकी पत्नी दिप्ती जो पूर्व में अभिनेत्री रह चुकी है और बेटा अप्रतिम के साथ खुशहाल पूर्वक जिंदगी जी रहा होता है। अनिकेत जब अपनी फिल्म के लिए एक नई अभिनेत्री का चयन करता है, इधर निर्देशक की पत् नी अपने पति की फिल्म की सफलता के लिए युवा अभिनेत्री को डांस और अभिनय में पारंगत कर उसका नाम बदलकर श्रीमति कर देती है। निर्देश युवा अभिनेत्री के बदले अंदाज को देखकर मंत्रमुग्ध हो जाता है और प्यार कर बैठता है।
यहां से निर्देशक के झार में कलह कर माहौल शुरु हो जाता है उसकी पत् नी उसे उलाहना देती हुई कहती है पप साल की उम्र में बेटे की उम्र की लड़की से चोरी दिपे मिलने जाते हो। उधर बेटा अप्रतिम विवाह बंधन में होने के कारण शिखा में अलग रुची रचखता है वह अपने माता पिता और श्रीमति की जिंदगह को जानने के साथ एक फिक्षन फिल्म बनाना चाहता है।
फिल्म में निर्देशन कमाल का है, जहां तक अभिनय की बात है तो निर्देशक के रोल में दिपाकंर डे का रोल, कमाल का है, शिखा के रोल में अन्नया चटर्जी भी खूब सराही गई है। रिया सेन संक्षिप्त भूमिका में होने के बावजूद घ्यान खींजती है।
सिनेमा की दुनियां में एक कलाकार और एक निर्देशक के प्यार के स्केंडल का परदे पर आना अपने आप में खास बात है। एक निर्देशक बेहद रचनात्मक सोच वाला जादू रखता है और अभिनय में डृबी सोच से जब उसका सामना होता है तो दिल प्यार को आ ही जाता है, लेकिन कभी कभी प्यार का यह ज्वार भाटा जिंदगी में कई तूफानों के साथ आता है। फिल्म बेहतरीन लब बांड की पुर्नखोज करती हुई लगती है और जैसे लहरें किनारा खोज लेती है उसी तरह से अनिकेत और दिप्ती भी सबंधों की नई खोज कर फिर एक हो जाते है।