मुंबई फिल्म महोत्सव : युवा निर्देशकों की सोच का जादू चल गया
Rajesh Yadav Monday, November 02, 2009 12:34 [IST]  

मुंबई. मुंबई फिल्म फेस्टीवल में तीसरे और चौथे दिन कुछ बेहद बेहतरीन फिल्में दिखाई गई। कल जहां वर्ल्ड सिनेमा की छवि को दिखाने वाली फिल्मों को दर्शकों ने बेहद पसंद किया वहीं रविवार को मुंबई फिल्म महोत्सव में भारतीय फिल्मों को दर्शकों ने खूब सराहा। पिछले दो दिनों से फिल्म महोत्सव में भारी भीड़ देखी जा रहीं है।

रविवार को वैसे तो कई फिल्मों को दिखाया गया लेकिन मुंबई फिल्म महोत्सव में आज रीजनल सिनेमा की फिल्मों का दिखाया जाना चर्चा के केंद्र में रहा। मराठी फिल्म निर्देशक सचिन कुंदालकर की फिल्म गंध और फिल्म निर्देशक रवि जाधव की मराठी फिल्म नटरंग को लोगों ने बेहद पसंद किया। इसके अलावा बंगाली फिल्म निर्देशक रितोपर्णो घोष की बंगला फिल्म अबोहोमान को भी भरपूर दर्शक मिलें ।

अबोहमान एक फिल्म निर्देशक और एक युवा अभिनेत्री के बीच पनपे सनसनीखेज संबंधो के कारण पारिवारिक रिश्तों में आने वाले तनाव, खीज के बीच एक विशेष प्रकार के लव बांड की खोज करती फिल्म है।

डायमेशंन मुंबई : युवा निर्देशकों की सोच का जादू चल गया

आज रविवार को महोत्सव में डायमेशंन मुंबई के तहत युवा फिल्म निर्देशकों की शार्ट फिल्मों का पर्दशन हुआ, जिसक तहत पाच पाच मिनट की शार्ट पिल्मों को दिखाया या है। इन 25 युवा निर्देशकों की इन फिल्मों में से जूरी द्वारा सबसे बेहतरीन शार्ट फिल्म का चयन किया जाएगा और विजेता फिल्म के निर्देशक को एक लाख पचास हजार रुपए का अवार्ड दिया जाएगा।

डायमेशंन मुंबई का आइडिया मुंबई फिल्म महोत्सव के लिए जया बच्चन ने दिया था और इसके लिए खुद उन्होंने एक लाख पचास हजार की राशि अपनी तरफ से स्पंसर भी की है। डायमेशंन मुंबई का यह दूसरा साल है और इस साल जो शार्ट फिल्में दिखाई गई है उसमें पिछली साल मंबई पर हुए 26 11आतंकवादी हमले के बाद की मुंबई, और भूमि पूत्र होने को लेकर विवाद के साथ मुंबई के युवाओं की सोच, सपनों के शहर के सच को बयान करते विषय को पटकथा का आधार बनाकर इन शार्ट फिल्मों का निमार्ण किया गया है। आज जिस तरह का रिस्पांस डायमेशंन मुंबई के तहत बनीं शार्ट फिल्मों के प्रदर्शन के समय दर्शकों का मिला है वह अपने आप में बेहद महत्वपूर्ण और खास हो जाता है।

मुंबई फिल्म महोत्सव में इस बार युवा निर्देशकों की सोच का जादू दर्शकों पर खूब चल रहा है। रोहित खोडे अपनी फिल्म आमची मुंबई में जहां मुंबई किसकी है? की तलाश कर रहें है तो वहीं बी ओ 06 25 एस 00 नाम की फिल्म में बम ब्लास्ट के दर्द को बता देतें है। समय जब ठहर जाता है , संगीत रुक जाता है उनकी याद में जो फिर कभी घर नहीं लौट सके और शेष रह जाती है दो मिनट की श्रंदाजलि, और वह एक इंसान हर रोज अपनो को इसी तरह 06 25 एस 00 पर याद करता है।

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