न्यूयार्क. अमेरिका के पूर्व टेनिस सितारे आंद्रे अगासी के प्रतिबंधित दवा के सेवन के कबूलनामे को वल्र्ड एंटी डोपिंग एजेंसी (वाडा) ने गंभीरता से लिया है। वाडा महानिदेशक डेविड हामैन के अनुसार, मामला अभी खत्म नहीं हुआ है और एजेंसी इस बात की जांच करना चाहती है कि अगासी के खिलाफ कोई आरोप बनता है या नहीं।
आठ बार के ग्रैंडस्लैम विजेता अगासी ने अपनी आत्मकथा ‘ओपन’ में खुलासा किया है कि १९९७ में कॅरियर के खराब दिनों में उन्होंने ‘क्रिस्टल मेथ’ का सेवन किया था। ड्रग परीक्षण में नाकाम होने के बाद अगासी ने एटीपी को पत्र लिखकर कहा कि उन्होंने गलती से अपने सहयोगी के सोडे का गिलास पी लिया, जिसमें प्रतिबंधित पदार्थ मिला था।
एटीपी ने उन्हें अभयदान देते हुए उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की थी। आत्मकथा के ये अंश ‘द टाइम्स’ ने प्रकाशित किए हैं। डेविड हामैन ने रविवार को कहा, ‘अगासी ने १९९७ में प्रतिबंधित दवा के सेवन की बात कबूली है। हम इस पर ज्यादा कुछ नहीं कर सकते क्योंकि बहुत अधिक समय बीत चुका है और हम सिर्फ आठ वर्ष की अवधि तक के मामलों की ही जांच कर सकते हैं।’
उन्होंने साथ ही कहा, ‘लेकिन दो चीजों की आगे जांच होनी चाहिए। पहली यह कि अगासी ने शपथ लेने के बावजूद झूठ बोलने की बात स्वीकार की है। इसलिए इसकी जांच होनी चाहिए कि क्या उनके खिलाफ कोई आरोप बनता है। हम सभी अमेरिकी धावक मेरियन जोंस के बारे में जानते हैं। उन्होंने एक ट्रिब्यूनल से झूठ बोला था और उन्हें इसका खामियाजा भुगतना पड़ा।’
वाडा महानिदेशक ने कहा, ‘दूसरी बात यह है कि अगर अगासी के वकील डो¨पग मामले में पेश हुए थे तो क्या वे जानते थे कि अगासी झूठ बोल रहे हैं।
इस मामले की भी जांच की जा सकती है। हो सकता है कि यह एटीपी के अधिकार क्षेत्र से बाहर की बात हो। लेकिन कोई और एजेंसी इसकी जांच कर सकती है।’उन्होंने कहा, ‘हम डो¨पग मामले में खिलाड़ियों को प्रतिबंधित करने के लिए केवल संबंधित खेल संस्था पर ही निर्भर नहीं रह सकते। इन मामलों को ऐसे ही नहीं छोड़ा जा सकता है। आप यह कहकर नहीं बच सकते कि मामले को आठ वर्ष से अधिक समय हो गया है। इसकी जांच होनी ही चाहिए।’