इस्लामाबाद. पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी की सहयोगी पार्टी मुहाजिर कौमी मूवमेंट ने उनसे इस्तीफे की मांग कर देश में नया राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। एमक्यूएम ने नेशनल रिकंसिलिएशन ऑर्डिनेंस को लेकर कड़ा रुख अपनाया है, जिसके तहत जरदारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले खत्म कर उन्हें 2007 में पाकिस्तान लौटने की अनुमति दी गई थी।
लंदन में रह रहे एमक्यूएम के नेता अल्ताफहुसैन ने कहा है कि पाकिस्तान की लोकतांत्रिक प्रणाली को बचाने के लिए जरदारी को बड़ी कुर्बानी देने के लिए तैयार रहना चाहिए। हुसैन का यह बयान तब आया है, जब पाक संसद एनआरओ पर विचार करने वाली है। जरदारी और पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले खत्म करने के लिए इस कानून को तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने मंजूरी दी थी।
एमक्यूएम के वरिष्ठ नेता मोहम्मद अनवर ने बताया कि हुसैन ने पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के एक वरिष्ठ मंत्री के जरिए इस संदेश को जरदारी तक पहुंचाया है। उन्होंने कहा, ‘अगर जरदारी ने कोई निर्णय नहीं लिया तो लोकतंत्र के पटरी से उतरने का खतरा पैदा हो जाएगा।’ हुसैन के बयान के ठीक बाद पाकिस्तान मुस्लिम लीग के नेता नवाज शरीफ ने कहा कि अगर संसद एनआरओ का समर्थन करती है तो वे इस कानून को कोर्ट में चुनौती देंगे।