चंद्रयान २ अभियान से भी हमें अपने इस उपग्रह से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां पाने में सफलता मिलेगी। चंद्रमा से जुड़े अभियानों में हमें हमारी अच्छी दशाएं उम्मीद से ज्यादा सफलताएं दिलाएंगी।
वर्तमान में 11 सितंबर, 2009 से भारत सूर्य की दशा के शुभ प्रभाव में चल रहा है। देश ११ सितंबर २क्१५ तक ६ वर्षो के लिए सूर्य की महादशा के सुख प्राप्त करेगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य आत्मा, अहम्, प्रभाव, यश, ऊर्जा, पराक्रम का कारक तत्व है। सूर्य ब्रrांड की आत्मा है, ईंधन, बिजली आदि का कारकत्व भी सूर्य के पास है। एक्स, कॉस्मिक और आधुनिक युग में परमाणु ऊर्जा के स्रोत रेडियम, हीलियम आदि का कारकत्व भी सूर्य के पास ही है। अत: निश्चय ही हम अगले ६ वर्षो के लिए इन विषयों में विशेष सफलता प्राप्त करेंगे।
स्वतंत्र भारत की पत्रिका वृष लग्न की है और सूर्य सुख भाव का स्वामी ग्रह है। तृतीय भाव में उष्णस्वभावी ग्रह विशेष रूप से शक्तिशाली होते हैं। अत तृतीय भाव में अपने मित्र ग्रह चंद्रमा की राशि में सूर्य के बैठने से सूर्य की यह स्थिति हमें पराक्रम से सुख और सफलता प्राप्त कराएगी। सूर्य की विशोंत्तरी महादशा अगले ६ वर्षो में हमें अपने सभी शुभ फलों के लाभ दिलाएगी और विश्व में देश का प्रभाव और मान बढ़ाएगी। अंतरिक्ष कार्यो का कारकत्व भी सूर्य के पास है, अत: इस अवधि में अंतरिक्ष के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलताएं मिलेंगी।
हमारे देश का वृष लग्न और कर्क राशि है। वृष लग्न के लिए भाग्य और कर्म भाव का स्वामित्व शानि के पास होने से यह सबसे ज्यादा बलशाली ग्रह होता है। चतुर्थ भाव से धरती और दशम भाव से आकाश अर्थात अंतरिक्ष की स्थितियों का अध्ययन किया जाता है। 8 सितंबर 2009 को शनि के कन्या राशि में प्रवेश के साथ ही हमारे देश से शनि की साढ़े साती भी उतर गई है।
वर्तमान में शनि लग्न कुंडली से पंचम भाव से गोचर कर रहा है, इससे हमारे देश की प्रतिष्ठा में वृद्धि हो रही है। इसी के प्रभाव से हमारे वैज्ञानिकों के परिश्रम सफल हुए और उन्हें चंद्रयान १ के प्रक्षेपण के उद्देश्यों में अभूतपुर्व सफलता मिली है। चंद्रमा की सतह पर जल की खोज से नासा तक के वैज्ञानिक हमारे वैज्ञानिकों की योग्यता का सम्मान कर उन्हें बधाईयां दे रहे हैं। शनि के वर्तमान गोचर के कारण आने वाले वर्षो में तकनीकी क्षेत्र में भी हम विशेष उपलब्धियां प्राप्त करेंगे। देश की चंद्र कुंडली से शनि के तृतीय भाव से गोचर करने के कारण हमारे पराक्रम के क्षेत्र में भी वृद्धि होगी।
अंग्रेजी में कहावत है कि ‘वेल बिगन इज हाफ डन’ अर्थात किसी कार्य की अच्छी शुरुआत ही उस कार्य को आधा संपन्न कर देती है। चंद्रयान १ के प्रक्षेपण के समय की पत्रिका ने ही इस अभियान की सफलता तय कर दी थी। इस कारण मैंने 30 नवंबर 2008 को इसी पृष्ठ पर अपने लेख में स्पष्ट लिखा था कि ‘सफलता लाएगा चंद्रयान’(देखें बॉक्स)। जब-जब देश के चंद्रयान अभियान का प्रसंग आएगा तो इस अभियान के प्रक्षेपणकाल की पत्रिका ही ज्योतिषीय विवेचन का आधार रहेगी और नींव का पत्थर साबित होगी।
प्रक्षेपण काल की पत्रिका, स्वतंत्र भारत की पत्रिका में सूर्य की विशोंत्तरी महादशा और वर्तमान में शनि का गोचर यह ही तय कर रहे हैं कि हम चंद्रमा पर परमाणु ईंधन भी निश्चित रूप से ११ सितंबर 2015 तक प्राप्त कर ही लेंगे और हम परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में आत्म निर्भर हो जाएंगे। सुयोग यह भी इंगित कर रहे हैं कि आगे भी चंद्रयान २ के प्रक्षेपण के समय चंद्रमा की सतह पर खुदाई से हमें वहां पानी और परमाणु ऊर्जा की प्राप्ति होगी।