शिमला. बेंचों पर उठा बवाल अब नगर निगम के हाउस में शांत होने के आसार दिख रहे हैं। शहर की कई महिला वरिष्ठ नागरिक स्वहस्ताक्षरित एक ज्ञापन निगम आयुक्त को सौंपेंगी। इसकी एक प्रतिलिपि निगम महापौर को भी सौंपी जाएगी।
वहीं पार्षद नवीन सूद ने कहा है कि वह अगले हाउस में शहर में लगे बेंचों और उनकी अनुमति पर सवाल उठाएंगे। उनका कहना है कि वह अनुमति की लिखित प्रति हाउस में सार्वजनिक करने की बात उठाएंगे। नवीन सूद ने कहा है कि शहरवासियों के अहित करने वाले किसी भी फैसले से राजनेताओं को बाज आना चाहिए।
बेंचों का ऐतिहासिक महत्व
शिमला में बेंचों का ऐतिहासिक महत्व है। टका बेंच और फाइव बेंचिज जैसे स्थान शिमला की पहचान का हिस्सा है। बुजरुगों का कहना है कि टका बेंच पर बैठने के लिए लोगों को टिकट लेना पड़ता था, लेकिन आज जब टका बेंच पर बेंच मुफ्त में उपलब्ध हैं तो निगम इन्हें हटाने की तैयारी कर रहा है। जाखू की चढ़ाई में लोगों के आराम के लिए बेंच लगाए गए।
इस जगह को अब फाइव बेंचिज कहा जाता है। इस मामले पर निगम को आपसी लड़ाई छोड़ कर दूरदर्शिता दिखानी चाहिए। जब यह बेंच लगाए गए तब शहर की आबादी 25 हजार के करीब हुआ करती थी। अब ढाई लाख के आसपास पहुंच गई है। ऐसे में शहर में कई अन्य तरह की सुविधाएं जुटाए जाने की जरूरत है। वहीं, निगम पहले से उपलब्ध सुविधा को खत्म करने पर अड़ा हुआ है।
अनुमति पर कलह
हैरानी की बात है निगम सिर्फ अनुमति की बात को लेकर अड़ गया है। लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए अनुमति या पॉलिसी भविष्य में भी तैयार की जा सकती है। प्रशासन और सदन को सकारात्मक रवैया अपनाते हुए अगर अनुमति नहीं ली गई है तो इसके लिए प्रावधान किया जाना चाहिए। निगम और प्रशासन को इस बात को ध्यान में रखना चाहिए की बेंच हटाने से शहरवासियों को परेशानी होगी। लिहाजा अनुमति के मामले में मिल बैठकर बीच का रास्ता निकाला जा सकता है।