करनाल. एक तरफ तो स्वास्थ्य विभाग प्राइवेट सेक्टर को टक्कर देने के लिए सिविल अस्पतालों में कई तरह की योजनाएं शुरू कर रहा है। रोगियों को पैकेज स्कीम के तहत आपरेशन व फ्री दवाएं देने की स्कीमों का लाभ दिया जा रहा है, लेकिन जो संसाधन पहले से ही अस्पतालों में उपलब्ध हैं उन्हें अपडेट करने की तरफ किसी का ध्यान नहीं है।
इसका उदाहरण करनाल सिविल अस्पताल में मौजूद स्टेट लैब है। कई तरह की बीमारियों की जांच के लिए करनाल में स्टेट लैब की स्थापना की गई, लेकिन इस लैब में सुविधाएं नाममात्र हैं। लैब की अधिकतर मशीनें पुरानी हो चुकी हैं। कुछ टेस्ट के लिए तो लैब में मशीनें तक ही नहीं हैं।
इससे लोगों को स्टेट लैब का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसके अलावा लैब का भवन भी जर्जर होता जा रहा है। ऐसा भी नहीं है कि इसे दुरूस्त करने के लिए मांग न भेजी गई हो, मांग भेजने के बाद भी इसे दुरूस्त नहीं किया गया। अब जब स्टेट लैब का यह हाल है तो बाकी जिलों की लैब का क्या हाल होगा यह सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
ये होते हैं टेस्ट स्टेट लैब में
स्टेट लैब में प्रदेश भर के लोगों के पेशाब टेस्ट, ब्लड टेस्ट, बायोकेमिकल टेस्ट, माइक्रोबायोलाजी टेस्ट सहित अन्य टेस्ट किए जाते हैं। इस लैब में सबसे बड़ी दिक्कत कई मशीनों का न होना है। इससे न तो यहां थायराइड का टेस्ट होता है और न ही इलेक्ट्रोलाइड का। इलेक्ट्रोलाइड की ट्रामा सेंटर में इमरजेंसी के दौरान जरूरत पड़ती है। मजबूरी में इन टेस्ट को बाहर से करवाया जाता है। यही नहीं हीमीटीलोलाजी के टेस्ट के लिए भी इधर-उधर भटकना पड़ता है।
डेंगू की जांच को एनालाइजर नहीं
बेशक से करनाल की इस लैब को स्टेट लैब का दर्जा मिला हुआ है, लेकिन यहां डेंगू की जांच के लिए एनालाइजर तक नहीं है। जांच के लिए किट की सुविधा तो उपलब्ध है, लेकिन बिना एनालाइजर कई बार कर्मचारियों को डेंगू की सही रिपोर्ट नहीं मिल पाती। असमंजस की स्थिति से बचने को दिल्ली से टेस्ट करवाना पड़ता है।
बजट की कमी है। जितना बजट है, उसके हिसाब से मरम्मत कार्य भी करवाया जा रहा है। बजट को बढ़ाने की डिमांड भेजी गई है, जिस पर मंजूरी मिलने की उम्मीद है। इसके बाद इस लैब को सभी सुविधाओं से परिपूर्ण कर दिया जाएगा। उपकरणों के लिए डिमांड भेजी हुई है। - डा. वंदना भाटिया, स्टेट बैक्टीरियोलॉजिस्ट, सिविल अस्पताल, करनाल