पूसा-1121 नहीं साबित हो पाई इस बार सोना
Bhaskar News Tuesday, November 03, 2009 01:46 [IST]  

करनाल. पूसा-1121 को बासमती का दर्जा मिलने व गत वर्ष अधिक रेट होने के कारण इस बार किसानों ने अधिक एरिया में इसकी रोपाई की। किसानों को उम्मीद थी कि रेट सही मिलने से उनका खर्च पूरा हो जाएगा, लेकिन उनके अरमान इस बार धरे के धरे रह गए। पूसा 1121 किसानों के लिए सोना साबित नहीं हो सकी। अनाज मंडी में किसानों को इसका रेट पिछले वर्ष की तरह नहीं मिल रहा।



स्थिति यह है कि गत वर्ष इस फसल का रेट 3000 से 3500 रुपए प्रति क्ंिवटल गया था, इस बार यह 1600 से 1800 रुपए पर ही ठहर गया है। मजबूरी में कई किसानों ने तो इसे बेच दिया, लेकिन कई किसानों ने इसे अभी न बेचने का निर्णय लिया है। किसानों का कहना है कि 1121 का रेट आने वाले दिनों में बढ़ेगा।



अधिक एरिया में की थी रोपाई



पुण्डरक गांव के किसान राजेंद्र सिंह, बलविंद्र सिंह, मदन लाल, सैयदपुरा के रमन सिंह, टिकरी कैलाश के राजेंद्र सिंह व सुखबीर सिंह का कहना है कि पूसा 1121 के पिछले वर्ष के रेट व बासमती का दर्जा मिलने के कारण उन्होंने इस बार अधिक एरिया में इसकी रोपाई की थी। इससे उन्हें उम्मीद थी, लेकिन मंडी में इसका रेट नहीं मिल रहा। इससे खर्च भी पूरा नहीं हो पा रहा है।



ठेका तीस हजार रुपए खर्च 20 हजार



किसानों का कहना है कि एक तो प्रति एकड़ खेत का ठेका तीस हजार, ऊपर से बीस हजार फसल उत्पादन का खर्च। इस बीच बारिश व सूखे ने उनकी कमर तोड़ दी। फसल को बचाने के लिए उन्होंने काफी खर्च किया। इतने बड़े खर्च के बाद सिर्फ पूसा 1121 से ही उम्मीद थी, लेकिन वह भी रेट नहीं दे सकी। इससे उन्हें फायदा होने की बजाय नुकसान हो रहा है।

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