चंडीगढ़. नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) की चेयरपर्सन अमल अलाना का कहना है कि देश को बाल थियेटर की जरूरत है। इसमें बच्चों के लिए अपार संभावनाएं मौजूद हैं। थियेटर के माध्यम से बच्चे कल्पना की उड़ान भरते हैं।
यह उनके भविष्य को सजने और संवारने के लिए जरूरी है। वे सोमवार को ‘भास्कर’ से बातचीत कर रही थीं। अमल सेक्टर—38 में स्थित विवेक हाईस्कूल में नाटक ‘मोहे रंग दे बसंती’ के मंचन के सिलसिले में आई हैं। वे मानती हैं कि बाल थियेटर व्यवसायिकता के लिहाज से बेहतर है पर इसका मंचन सफल मंचन चुनौतियों से भरा है।
अमल कहती हैं कि विवेक स्कूल का बच्चों के नाटक के आयोजन का प्रस्ताव स्वीकार करने के बाद विषय निर्धारण और स्क्रिप्ट लिखना चुनौती से भरा था। स्क्रिप्ट में सजीवता के लिए स्कूल में कार्यशाला लगाने के बाद बच्चों के सहयोग से स्क्रिप्ट तैयार की गई ।
थियेटर में पति का सहयोग : अमल अलाना और उनके पति डॉक्टर निसार अलाना ने एक साथ स्कूली शिक्षा प्राप्त की है। निसार एमबीएस हैं। लेकिन उनका दिल नाटक में ही लगता है। अमल पंजाब यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ इंडियन थियेटर की चेयरपर्सन भी रह चुकीं है। वे कहती हैं कि पति हरदम सहयोग करते हैं।
‘मोहे रंग दे बसंती’ में 500 बच्चे : उन्होंने बताया कि ‘मोहे रंग दे बसंती’ पंजाब के सामाजिक और सांस्कृतिक ताने—बाने पर आधारित है। इसमें छठीं से 12वीं कक्षा के 500 बच्चे भाग ले रहे हैं। पांच स्टेज तैयार किए गए हैं। मंच सज्जा का जिम्मा डॉ. निसार संभाल रहे हैं। इसमें 13 गीत हैं। इन्हें मदनगोपाल ने संगीतबद्ध किया है। इसकी अवधि 1.10 मिनट है।
स्कूलों में थियेटर की पढ़ाई : वे कहती हैं कि वर्ष 2010 से स्कूलों में तीसरी कक्षा से थियेटर की पढ़ाई शुरू होगी। एनसीआरटी ने सिलेबस बनाने का जिम्मा एनएसडी को सौंपा था। सिलेबस तैयार है। इसे लागू करने के लिए देश के कई स्कूलों में कार्यशाला आयोजित की गई हैं। अमल कहती हैं कि थियेटर से बच्चों में टीम भावना पैदा होती है।
5 नवंबर को मंचन : विवेक हाईस्कूल में नाटक ‘मोहे रंग दे बसंती’ का मंचन 5 नवंबर की शाम 6.45 बजे होगा।