हरियाणा को मिलेगा अलग हाईकोर्ट
भास्कर न्यूज Tuesday, November 03, 2009 02:24 [IST]  

चंडीगढ़. हरियाणा गठन के समय से उठ रहा राज्य के लिए अलग हाईकोर्ट का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में है। राज्य सरकार अलग हाईकोर्ट के संबंध में अपनी फाइल विधि मंत्रालय को भिजवा चुकी है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने इस बारे में प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को पत्र भी लिखा है।



उनके पत्र के बाद विधि मंत्रालय ने इस मुद्दे पर कुछ तेजी दिखाई है। केंद्रीय कानून मंत्री वीरप्पा मोइली का कहना है कि अलग हाईकोर्ट के मामले पर विचार चल रहा है। हरियाणा के वकील राज्य सरकार पर दबाव बना रहे हैं कि प्रदेश को अगले साल तक अलग हाईकोर्ट मिल जाए।



सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल



अलग हाईकोर्ट का मुद्दा हुड्डा सरकार की पांच प्राथमिकताओं में शामिल है। मुख्यमंत्री चाहते हैं कि अलग हाईकोर्ट के लिए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मौजूदा भवन में ही जगह दी जाए। ज्यादातर राज्यों के हाईकोर्ट उनकी राजधानियों में हैं, ऐसे मंे हरियाणा सरकार कहीं और हाईकोर्ट बनाकर चंडीगढ़ पर अपने दावे को कमजोर नहीं करना चाहती।



वकीलों को अगले साल तक उम्मीद



हरियाणा के वकीलों को उम्मीद है कि 2010 तक राज्य को अपना हाईकोर्ट मिल जाएगा। वकील कहते हैं कि वर्तमान हाईकोर्ट में पंजाब व हरियाणा के जजों का अनुपात 60:-40 का है और करीब 20 पद रिक्त पड़े हैं। संयुक्त कोर्ट होने से तैनाती में ज्यादा समय लग जाता है। अगर दोनों राज्यों के चीफ जस्टिस अलग हों तो इस प्रक्रिया में तेजी आएगी और हरियाणों के वकीलों को जज बनने के मौके ज्यादा मिलेंगे। जज पूरे होने पर लंबित केस भी जल्दी निपटेंगे। वकील अनुराग कुमार कहते हैं कि जनहित में अलग हाईकोर्ट जरूरी है।



दोनों राज्यों को होगा फायदा



बार काउंसिल ऑफ पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के चेयरमैन प्रताप सिंह का कहना है कि अलग हाईकार्ट बनने से पंजाब व हरियाणा दोनों को फायदा होगा। कानूनन भी हर राज्य को अलग हाईकोर्ट मिलना चाहिए। ज्वाइंट हाईकोर्ट होने से पार्किग व चेंबर की समस्या रहती है। आने वाले दिनों में जजों के कमरों की समस्या भी बढ़ेगी क्योंकि हाईकोर्ट की मौजूदा बिल्डिंग में और कमरे नहीं बन सकते।



हरियाणा के लिए अलग हाईकोर्ट बनने से ये सारी दिक्कतें दूर हो जाएंगी। रोहतक से एडवोकेट अश्विनी कुमार ने कहा कि अलग हाईकोर्ट बनने के बाद जनता का खर्च बचने के साथ वकीलों का भी समय बचेगा। अलग हाइकोर्ट चंडीगढ़ की बजाय प्रदेश के सेंटर में होना चाहिए, ताकि चारों तरफ के लोग आसानी और जल्दी हाईकोर्ट में पहुंच पाएं। इससे लोगों का समय और पैसा दोनों ही बचेगा और वे न्याय प्राप्त कर सकेंगे।



पानीपत की वकील सर्वप्रीत बाजवा ने कहा कि हाईकोर्ट अलग होने से न्याय जल्द मिलेगा और लोगों का न्यायपालिका में विश्वास बढ़ेगा। वकीलों को चंडीगढ़ जाने की जरूरत भी नहीं रहेगी। वे प्रदेश में ही प्रेक्टिस कर सकेंगे। खासकर महिला वकीलों को राहत मिलेगी।



कोशिश कर रही सरकार



हरियाणा के अलग हाईकोर्ट के लिए सरकार कोशिश कर रही है। राज्य सरकार कोशिश करेगी कि विधि मंत्रालय इस फाइल को जल्दी क्लीयर कर दे।



भूपेंद्र सिंह हुड्डा, मुख्यमंत्री, हरियाणा



कुछ गलत नहीं



पंजाब सरकार हरियाणा के लिए अलग हाईकोर्ट बनाने को गलत नहीं मानती। मौजूदा हाईकोर्ट पंजाब के लिए ही बनाया गया था। हरियाणा चाहे तो अपने राज्य में कहीं भी हाईकोर्ट बना सकता है। चंडीगढ़ पंजाब की राजधानी है और यहां केवल पंजाब का हाईकोर्ट होगा।



डॉ. दलजीत सिंह चीमा राजनीतिक सलाहाकार, मुख्यमंत्री, पंजाब

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