चंडीगढ़. हरियाणा में नए मंत्रिमंडल का गठन माथा-पच्ची भरा साबित हो रहा है। कांग्रेस के कई दिग्गज नेता, निवर्तमान मंत्रियों के मंत्रिमंडल से बाहर बैठने की सुगबुगाहट ने राजनीति में गरमाहट ला दी है। हालांकि पिछले तीन दिनों से तूफान से पहले शांति जैसा आलम है लेकिन अंदर पक रही खिचड़ी नया गुल खिलने के संकेत दे रही है।
खुद मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा मंत्रिमंडल गठन का सवाल पूछते ही खबरनवीसों से यह कह कर बात करते-करते चल देते हैं कि जब गठन होगा तो पता चल जाएगा। जो नई बातें सामने आई हैं, उनमें मंत्रिमंडल में कांग्रेस को समर्थन देने वाले विधायकों को एडजस्ट करने की मुहिम के चलते जातिगत समीकरण गड़बड़ा रहे हैं। 6 या 7 नवंबर को मंत्रिमंडल के पत्ते खुलने की उम्मीद है।
बताया जा रहा है कि मंत्रिमंडल में हर क्षेत्र को प्रतिनिधित्व, जातिगत समीकरण, वरिष्ठ नेताओं की भागीदारी व महिलाओं की भागीदारी का ध्यान रखा जा रहा है। कांग्रेस को 6 या 7 पदों से संतोष करना पड़ सकता है। शेष मंत्री गैर कांग्रेसियों के बनने की उम्मीद है। कम से कम 4 या 5 निर्दलीय बाजी मारेंगे। निर्दलीयों में जलेबखान, गोपाल कांडा, सुखबीर कटारिया, प्रहलाद गिल्लाखेड़ा, ओमप्रकाश जैन, शिवचरण शर्मा मंत्री पद के लिए अड़े हुए हैं। जलेब खान के समर्थक ने तो चंडीगढ़ में एक नवंबर को उनकी मौजूदगी में मंत्री बनने के संकेत दिए। बसपा के अकरम खान की भी पूरी उम्मीद है। मेवात के दिग्गज कांग्रेसी नेता खुर्शीद अहमद के बेटे आफताब को पद से वंचित रहना पड़ सकता है।
इधर, हजकां का बाहर से समर्थन देना लगभग तय है। कुलदीप बिश्नोई पद लेते हैं तो हजकां के सतपाल सांगवान व राव नरेन्द्र सिंह का मंत्री बन सकते हैं। उनके पद न लेने की स्थिति में धर्मसिंह छोकर या विनोद भ्याणा में से एक को तवच्जो मिलेगी।
निवर्तमान मंत्रियों में कैप्टन अजय सिंह यादव, किरण चौधरी व रणदीप सुरजेवाला का मंत्री बनना पुख्ता है। सावित्री जिंदल की राह आसान नहीं है क्योंकि वैश्य जाति से गोपाल कांडा व ओमप्रकाश जैन मंत्री बनते हैं तो उनका पद संकट में पड़ सकता है। निवर्तमान विधानसभा अध्यक्ष रघुबीर कादियान, संपत सिंह व निवर्तमान मुख्य संसदीय सविच धर्मबीर को ताकत लगानी पड़ रही है।
पता चला है कि संपत सिंह को मंत्री पद से रोकने के लिए कांग्रेस व हिसार का गैर कांग्रेसी खेमा ताकत लगाए हुए है। अहीरवाल में मंत्री पद को लेकर कम संघर्ष नहीं है। राव दानसिंह व अनिता यादव उम्मीद लिए हुए हैं तो सांसद राव इंद्रजीत सिंह अपने भाई यादवेन्द्र के लिए जुटे हुए हैं। अगर हजकां शामिल हो गई तो इनकी राह डगमगा जाएगी।
सोनिया की महिलाएं व राहुल के युवा
चर्चा यह भी है कि सोनिया गांधी के महिलाओं के प्रति रुझान को देखते हुए मंत्रिमंडल में महिलाओं पर विशेष मंथन किया जा रहा है। मंत्रिमंडल में तीन-चार महिलाएं तो जरूर होंगी। राहुल के युवा फैक्टर पर भी ध्यान है। मुख्यमंत्री हुड्डा इस प्रयास में हैं कि महिलाओं व युवाओं को उचित प्रतिनिधित्व मिले।