रायपुर. शहर में मनोरंजन की सुविधाओं को बढ़ाने के लिए गांधी उद्यान में अप्पूघर समेत ढेर सारी अन्य सुविधाएं जुटाने की योजना है। पुरखौती मुक्तांगन के पास टॉय ट्रेन के साथ विशाल बगीचा विकसित करने की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है।
नगरीय प्रशासन मंत्री राजेश मूणत का कहना है कि सरकार राजधानी समेत ऐसी कॉलोनियों की सहकारी समितियों को भंग करने की तैयारी कर रही है, जहां विकास के काम पूरे हो चुके हैं। इस कॉलोनियों में सड़क, नाली से लेकर प्रकाश तक का सारा इंतजाम पहले से ही नगर निकाय कर रहे हैं।
इस बात की लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि समितियों के पदाधिकारी प्लॉट या मकान की खरीदी-बिक्री में तय राशि से कहीं ज्यादा पैसा ले रहे हैं, जिससे आम लोगों को परेशानी हो रही है। हाउसिंग बोर्ड से कहा गया है कि कॉलोनी में मकानों की बिक्री चालू करने के पहले वह हर केटेगरी का एक-एक नमूना मकान बनाए।
ताकि लोगों को पता चले कि किस तरह की टाइल्स या सामग्री उनको मिलने वाली है। भास्कर कार्यालय में पहुंचे मंत्री मूणत ने बताया कि पिछले 20 सालों के दौरान राजधानी में विकास की दिशा मास्टर प्लान के हिसाब से नहीं रही। लोगों ने सड़क, नाली का ध्यान रखे बिना मकान बना लिए और कालोनियां बना लीं।
अब इन खामियों को दूर करने की कोशिश की जा रही है। कॉलोनियों के सही विकास के लिए केंद्र शासन ने भी एक्ट बना लिया है। राज्य में इस तरह की कोशिश पहले से ही का जा रही थी। केंद्र शासन के एक्ट का अध्ययन कर नया एक्ट कुछ महीनों के अंदर लाया जाएगा। मोतीबाग के पीछे की जमीन पर अप्पूघर तैयार करने के लिए रायपुर नगर निगम से प्रस्ताव नए सिरे से तैयार करने को कहा गया है। जरूरत पड़ी तो राज्य सरकार इसके लिए पांच से छह करोड़ रुपए देगी।
राजधानी के लोगों के लिए ज्यादा से ज्यादा मनोरंजन के साधन विकसित करने की दिशा में गंभीर प्रयास हो रहे हैं। नगरीय प्रशासन मंत्री ने बताया कि शहर की झोपड़पट्टियों में रहने वाले गरीबों को पक्के सुविधायुक्त मकान देने की स्कीम के लिए महाराष्ट्र और कर्नाटक के मॉडल का अध्ययन किया जा रहा है।
कर्नाटक में इस मकान के लिए 1.60 लाख प्रति फ्लैट के हिसाब से दर तय कर निजी बिल्डरों को भी आमंत्रित किया गया है। बूढ़ातालाब को भी गुजरात के पैटर्न पर विकसित करने की योजना है। शहर में फ्लाईओवर के बारे में मूणत का कहना है कि इसके अलावा हमारे पास कोई दूसरा विकल्प है भी नहीं। देर सबेर सरकार को इस बारे में फैसला करना ही होगा।