बासी जन्मदिन पर शाहरुख का कल्पना संसार
जयप्रकाश चौकसे Tuesday, November 03, 2009 02:34 [IST]  

आज शाहरुख खान अपने जन्मदिन पर भेजे गए गुलदस्तों से भेजने वालों के कार्डस निकालकर धन्यवाद के पत्र लिख रहे होंगे। बासी जन्मदिन बड़ी राहत का दिन होता है, क्योंकि विगत दिन की थकान दूर करनी होती है। यह दिन अपने शुभचिंतकों की विराट संख्या पर इतराने का दिन है।

समझदार सितारे ट्रक भरकर भेजे गए गुलदस्तों और आयात किए फूलों की डलियों को अनाथालयों और वृद्धाश्रमों में भेज देते हैं। आजकल अस्पताल मच्छरों को आकर्षित करने वाली चीजों को स्वीकार नहीं करते। बासी जन्मदिन अलसाया हुआ, उनींदा सा दिन होता है। यह उत्तेजना की लहर के लौटने का दिन होता है।

यह संभव है कि आज के दिन शाहरुख यह विचार करें कि बीस वर्ष बाद उनका बुढ़ापा कैसा होगा। क्या अमिताभ बच्चन की तरह उनका तमाशा जारी रहेगा? यह तो तय है कि करण जौहर बूढ़े शाहरुख को केंद्र मंे रखकर उस समय भी याराना निभाते हुए फिल्म बना रहे होंगे। करण जौहर के जीवन और सृजन में शाहरुख खान बचपन के कुटैव की तरह हमेशा समाए रहेंगे।

यह भी संभव है कि शाहरुख खान आज सुपुत्र आर्यन और सुपुत्री सुहाना के करियर के बारे में सोचें। उनके मन में यह तीव्र इच्छा होगी कि आर्यन उनकी तरह सफल सितारा बने। शाहरुख खान अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी के पिता की तरह सोच सकते हैं कि अगर मेरा बेटा चुनाव नहीं जीता तो मैं उसके लिए एक देश खरीद लूंगा। अमीर आदमी के मन से खरीद-फरोख्त की बात कभी नहीं मिटती।

स्वयं शाहरुख खान को बहुत कठोर संघर्ष करना पड़ा। बड़ी मुश्किल से मिली पहली फिल्म थी ‘अहमक’, जो शायद फ्योदोर दोस्तोवस्की के उपन्यास ‘इडियट’ से प्रेरित थी। उन्हें ‘फौजी’, ‘दिल दरिया’ और ‘सर्कस’ सीरियल मिले। इसी दौर में अजीज मिर्जा ने उनकी हौसला अफजाई की। ‘राजू बन गया जैंटलमैन’ पहले प्रारंभ हुई, परंतु ‘दीवाना’ पहले प्रदर्शित हुई।

अब्बास-मस्तान की ‘बाजीगर’ की नकारात्मक भूमिका ने उन्हें लोकप्रियता दिलाई, परंतु आदित्य चोपड़ा की ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ ने सितारा हैसियत दिलाई। यह तो तय है कि आर्यन को कोई संघर्ष नहीं करना पड़ेगा, वरन उसे प्रस्तुत करने की होड़ आदित्य चोपड़ा, फरहा खान और करण जौहर में होगी। आर्यन चाहेंगे कि उनकी नायिका अजय-काजोल की पुत्री न्यासा या जूही मेहता (चावला) की पुत्री हो।

यह भी संभव है कि शाहरुख खान स्वयं अपने पुत्र को निर्देशित करना चाहें और ऐसी स्थिति में करण जौहर और फरहा खान उनके सहायक होंगे। अगर ऐसा होता है तो यह सब कुछ शाहरुख की लिखी आर्यन के जीवन की पटकथा के अनुरूप होगा, परंतु ऊपरवाला क्या चाहता है, यह समय ही बताएगा। यह भी संभव है कि करियर या प्रेम को लेकर पिता-पुत्र में अकबर बनाम सलीम की तरह ठन जाए और कन्या ‘कभी खुशी कभी गम’ की तरह परोंठा गली की हो।

प्रवासी भारतीय लोगों के प्रेम ने शाहरुख को अपार लोकप्रियता दिलाई, अत: संभव है कि पुत्र आर्यन एनआरआई कन्या को वर कर ‘स्वदेस’ के नायक की तरह नासा में वैज्ञानिक हो और मधुरात्रि के लिए चांद पर पहुंचे। पिता के लिए आकाश सीमा है, शायद पुत्र के लिए आकाश के परे कुछ हो। बहरहाल अपने बासी जन्मदिन पर शाहरुख के मन में कई तरह के ख्याल आ सकते हैं। सारा दिन वह अपने बाथरूम में बिताएंगे, जो उनका कल्पना संसार है।

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