चंडीगढ़. प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के लिए पंजाब यूनिवर्सिटी गुरुकुल भी रही है और कर्मस्थली भी। बतौर विद्यार्थी वह मेधावी छात्र रहे और गुरु के रूप में उनकी सादगी और अपनत्व के किस्से आज भी उनके शिष्यों के जहन में ताजा हैं।
करीब 37 साल बाद जब मंगलवार को डॉ. मनमोहन सिंह के कदम अपने गुरुकुल में पड़ेंगे, तो कुछ पुरानी यादें ताजा होंगी। वहीं, पीयू को प्रधानमंत्री से कई उम्मीदें होंगी। 127 बरस से देश में शिक्षा का अहम केंद्र रही पीयू अब सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा मांग रही है।
इस दौरे में रस्मी तौर पर तो प्रधानमंत्री सेक्टर—25 में बनने वाले पीयू के मल्टीपर्पज हॉल का शिलान्यास करेंगे और फिर जिम्नेजियम हॉल में होने वाले समारोह में हिस्सा लेंगे। दोपहर पौने तीन बजे होने वाले इस समारोह में डॉ. सिंह को पीयू की ओर से डॉक्टर ऑफ लॉ की डिग्री से सम्मानित किया जाएगा।
इन औपचारिक कार्यक्रमों के साथ पीयू के शिक्षकों से लेकर छात्रों को डॉ. सिंह से कई अपेक्षाएं हैं। डॉ. सिंह ने पीयू से 1954 में इकोनॉमिक्स में एमए किया। 1957 से 1965 तक पीयू के इकोनॉमिक्स डिपार्टमेंट में बतौर शिक्षक रहे। इसी दौरान ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से डी. फिल की। इसी बीच रेनबरी स्कॉलर ऑफ द यूनिवर्सिटी ऑफ कैम्ब्रिज का सम्मान हासिल किया।
यही वह दौर था जब डॉ. सिंह ने बतौर शिक्षक अपने विद्यार्थियों ही नहीं, साथी शिक्षकों का भी दिल जीता। 1966 में न्यूयॉर्क मंे यूनाइटेड नेशन सेकेट्रेरिएट में इकोनॉमिक अफेयर्स ऑफिसर का कार्यभार संभालने के लिए पीयू को अलविदा कह गए। 1980 से 82 के बीच प्लानिंग कमीशन के मेंबर सेक्रेटरी और फिर रिजर्व बैंक के गवर्नर रहते हुए डॉ. सिंह दो बार पीयू आए। लेकिन यह दौरा आधिकारिक नहीं था, वह अपने शिष्य और फिर साथी शिक्षक रहे प्रो. विनोद कुमार गुप्ता के घर मिलने आए थे। अब करीबन 37 साल बाद डॉ. सिंह पीयू आ रहे हैं। इस दौरे में अगर प्रोटोकॉल बाधा न बना तो पीयू के शिक्षक और विद्यार्थी अपने एल्यूमनी से पुराने भावनात्मक रिश्ते का वास्ता देकर इस गुरुकुल के भविष्य के लिए नई दिशा तय करने की मदद मांग सकते हैं।