शॉपिंग करना या घर में नया सामान लाना आखिर किस शख्स को नहीं जंचता। लेकिन आप इसे आसानी से और अपनी जरूरत के अनुरूप पसंद कर ही खरीदते हैं। यही सहूलियत रिटेल मैनेजर्स मुहैया करवाते हैं। आप भी अगर इसमें दिलचस्पी रखते हैं तो इस क्षेत्र में अपना कॅरियर संवार सकते हैं।
युवाओं के लिए शॉपिंग अब शौक का रूप लेती जा रही है। शॉपिंग करने की पूरी प्रक्रिया ही समय के साथ बदल गई है। खासतौर से एक तरफ इसका प्रारूप बदला तो दूसरी तरफ खरीदार का नजरिया और व्यवहार भी बदल गया। इसके लिए तेजी से बढ़ते शहरीकरण, पैर पसारते शॉपिंग सेंटर और मल्टीस्टोरी मॉल्स का बड़ा योगदान रहा है। इन्होंने वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर डाला है और एक नई उभरती इंडस्ट्री को आकार दिया है।
क्या है रिटेल इंडस्ट्री x रिटेल इंडस्ट्री को सबसे ज्यादा तेजी से बढ़ने वाली इंडस्ट्री कहना गलत नहीं होगा। इसने कई देशों के आर्थिक विकास में महती भूमिका निभाई है। रिटेल शब्द की उत्पत्ति फ्रेंच शब्द ‘रिटेलर’ से हुई, जिसका अर्थ है ‘एक टुकड़ा अलग करना’ या फिर ‘ढेर को बांटना’। रिटेल कारोबार में प्रोडक्ट बेचना और ग्राहक के लिए सेवा देना अहम काम है।
संभावनाएं भारत में 80 के दशक में रिटेल कारोबार में उछाल आया और थोड़े ही समय में भारतीय रिटेल इंडस्ट्री दुनिया के रिटेल मार्केट में पांचवीं सबसे उभरती और आकर्षक इंडस्ट्री बन गई। इंडियन रिटेल इंडस्ट्री जीडीपी में तकरीबन 10 और रोजगार में 8 फीसदी का योगदान देती है। इसके अगले पांच वर्षो में 30 फीसदी की दर से बढ़ने की संभावना है।
रिटेल प्रक्रिया में ग्राहक के साथ ताल-मेल और व्यापार में डिजाइन के स्तर से लेकर सामान को पहुंचाना और पोस्ट डिलीवरी सर्विस का को-ऑर्डिनेशन शामिल है। रिटेल श्रंखला को कई तरह से बांटा जा सकता है। जिन्हें उसके आकार, प्रोडक्ट रेंज, कीमत और दी जा रही सेवाओं के चलते अलग-अलग किया जा सकता है। इनमें स्पेशलिटी स्टोर, सुपर मार्केट-मॉल्स, फैक्ट्री आउटलेट्स, फ्रेंचाइजी, चेन स्टोर्स, डिस्काउंट स्टोर, लाइफ स्टाइल व पर्सनल प्रोडक्ट्स इत्यादि शामिल हैं।
कार्य का स्वरूप एक करियर के तौर पर रिटेल मैनेजमेंट काफी डायनेमिक क्षेत्र है जो प्रतिभाशाली युवाओं को रोजगार के नए मौके उपलब्ध करवाता है। दुनियाभर में यह क्षेत्र तकरीबन 20 लाख लोगों को रोजगार देता है। इस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए बुनियादी शिक्षा व प्रशिक्षण के साथ ही व्यक्तिगत कौशल की भी जरूरत होती है। आपकी संप्रेषण क्षमता बेहतर है तो आप इस क्षेत्र में विशिष्ट पहचान बना सकते हैं। हालांकि यह पूरा काम प्रोडक्ट के बेचने से जुड़ा हुआ है लेकिन करियर के लिहाज से इसमें कई मौके हैं, जैसे-सेल्स व मार्केटिंग, ऑपरेशन, कांसेप्ट एंड डिजाइन, खरीद, मर्चेडाइजिंग और प्रबंधन संबंधी इत्यादि-इत्यादि।
इस क्षेत्र की नामी कंपनियां रिटेल सेक्टर से कई प्रतिष्ठित कंपनियां जुड़ी हुई हैं। इनमें रिलायंस ग्रुप, आईटीसी रिटेल, आदित्य बिरला ग्रुप, टाटा ग्रुप का ट्रेंट एंड वेस्टसाइड, सुभिक्षा, शॉपर्स स्टॉप, फ्यूचर ग्रुप का बिग बाजार व पैंटालून, रेमंड्स, लाइफ स्टाइल इंटरनेशनल, स्पेंसर्स इत्यादि प्रमुख हैं।
कोर्स व योग्यताः आप चाहें तो स्नातक के बाद रिटेल मैनेजमेंट में डिप्लोमा कर सकते हैं। कुछ संस्थान रिटेल मैनेजमेंट में एमबीए, पीजी डिप्लोमा जैसे कोर्स करवाते हैं। रिटेलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आरएआई) कॉमन एडमिशन रिटेल टेस्ट (सीएआरटी) राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित करती है। यह पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम रिटेल मैनेजमेंट के कोर्स में दाखिले के लिए होता है।
रोजगार के अवसरः अर्थव्यवस्था की तरक्की के साथ रिटेल मैनेजमेंट एक बेहतर कॅरियर विकल्प के रूप में उभरा है। यहां मार्के टिंग से लेकर ब्रांडिंग तक के अवसर मौजूद हैं। यहां काम का समय और सही माहौल आपकी कंपनी पर ही निर्भर करता है। मैनेजमेंट प्रशिक्षु से कॅरियर की शुरुआत करके मौजूद विभागों में मैनेजर स्तर पर पहुंचा जा सकता है। इस विधा के दक्ष लोगों को रिटेल शॉप्स के अलावा विज्ञापन एजेंसियों, एयरलाइंस, इंश्योरंेस कंपनियों व बैंकों में भी रोजगार मिल सकता है।
पारिश्रमिकः यह कंपनी, काम के स्वरूप और कार्यक्षेत्र पर निर्भर करता है। सेल्स से जुड़े व्यक्ति की शुरुआत यहां 4-५ हजार रुपए प्रतिमाह से होती है। फिर पोस्ट बढ़ने के साथ ही वेतन १५ से २क् हजार रुपए मासिक तक पहुंच सकता है।
कोर्स करवाने वाले संस्थान
अकादमी ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, देहरादून
सेंटर फॉर एडवांस नेटवर्क इंजीनियरिंग एंड रिसर्च, बेंगलुरु
एमआईटी इंस्टीट्यूट ऑफ डिस्टंेस एजुकेशन, पुणो
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, अलीगढ़
अन्नामलाई यूनिवर्सिटी, अन्नमलाई नगर
एपीजे इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, नई दिल्ली