Health/ Science
केप्नोमीटर के जरिए अस्थमा के अटैक में राहत
Bhaskar News Tuesday, November 03, 2009 03:35 [IST]  

जयपुर. अस्थमा अटैक में मरीजों को राहत देने के लिए एसएमएस मेडिकल कॉलेज के वक्ष एवं क्षय रोग विभाग के डॉ. नरेन्द्र खिप्पल ने केप्नोमीट्रिक असिस्टेड रेस्पीरेटरी ट्रेनिंग (सीएआरटी) तकनीक का इस्तेमाल शुरू किया है।



उन्होंने बताया कि अस्थमा का अटैक होने पर केप्नीमीटर उपकरण शरीर में कार्बन डाई ऑक्साइड का स्तर घटा देता है, जिसके बाद मरीज को आराम मिल जाता है। मरीजों को केप्नोमीटर की सहायता से सांस लेने का चार से छह हफ्ते का निशुल्क प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।



ऐसे की जाती है जांच : केप्नोमीटर उपकरण द्वारा अस्थमा के मरीज के नाक और मुंह से निकलने वाली कार्बन डाई आक्साइड की मात्रा की जांच की जाती है। मरीज को धीमा, हल्का एवं समान सांस लेने का एक निश्चित स्तर पर रखने का प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है, जिसके बाद मरीज अस्थमा के तेज अटैक से बच सकता है। साथ ही मरीज को दवाओं की जरूरत भी कम पड़ेगी।



क्या है अस्थमा : ट्रिगर्स (धूल या धुआं, फूलों के परागकण, मौसम का बदलना, ठंडी हवा चलना, मानसिक तनाव) से श्वसन नली की मांसपेशियां सिकुड़ जाती हैं, जिसके कारण फेफड़ों में कफ या चिपचिपा बलगम जमा हो जाता है। इसके बाद के लक्षणों में जोर की खांसी, जीभ का नीला होना, सांस फूलना, छाती में जकड़न व भारीपन तथा सांस लेने में सीटी की तरह आवाज आने लगती है। ऐसी स्थिति में शरीर में धीरे धीरे ऑक्सीजन कम होती जाती है और फिर मस्तिष्क में खून का संचार कम होने तथा श्वास केन्द्र के अत्यधिक संवेदनशील होने से अस्थमा का अटैक जानलेवा साबित हो सकता है। तब रिलीवर दवाएं भी काम नहीं आती।

  Bookmark and Share
 


अपने विचार यहां लिखें:
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: