जोधपुर. जोधपुर, जयपुर व अजमेर विद्युत वितरण निगम के जीएसएस उम्रदराज कर्मचारियों के भरोसे चल रहे हैं। तीनों कंपनियों में हेल्पर पद पर कार्यरत साठ प्रतिशत से अधिक कर्मचारी 55 से 59 साल की उम्र में बिजली के खंभे पर चढ़कर काम करते हैं।
देश में सभी सरकारी विभागों में से सबसे ज्यादा उपभोक्ता बिजली महकमे के हैं, जबकि बिजली व्यवस्था को दुरुस्त रखने का काम हेल्पर के जिम्मे होता है। जयपुर, जोधपुर व अजमेर डिस्कॉम में वर्ष 1980 के बाद हेल्पर पद पर कर्मचारियों की भर्ती नहीं हुई।
हालांकि जोधपुर डिस्कॉम ने वर्ष 2007 से लेकर 2009 तक करीब 6 हजार आईटीआई होल्डर्स की तकनीकी हेल्पर के तौर पर भर्ती की, लेकिन यह जोधपुर डिस्कॉम के 11 जोन में बने 132/ 200/ 400 केवी के करीब 25 हजार जीएसएस के सामने ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। ऐसे में वर्षों से हेल्पर पद पर कार्यरत कर्मचारी उम्रदराज होते जा रहे हैं। इसके बावजूद 55 से 60 साल की उम्र के बुजुर्गों को खंभों पर चढ़वा कर कार्य करवाया जा रहा है।
भले ही उनकी शारीरिक क्षमता भी जवाब दे रही हो, डिस्कॉम प्रशासन इन्हें युवा मानकर कार्य करवा रहा है। कई सालों से तीनों वितरण कंपनियों में भर्ती नहीं होने से 60 प्रतिशत कर्मचारी रिटायरमेंट की उम्र में पहुंच गए हैं। वहीं कई रिटायर भी हो चुके हैं।
इसलिए होती हैं दुर्घटनाएं : जोधपुर, जयपुर व अजमेर डिस्कॉम में हर दूसरा हेल्पर बिजली दुर्घटना (करंट) की चपेट में आकर आंशिक या पूर्ण रूप से विकलांग हुआ है। इन दुर्घटनाओं के सबसे अधिक शिकार 50 से 60 साल की उम्र के कर्मचारी हुए हैं, जो बिजली के खंभों से गिरकर या अन्य कारणों से घायल हुए हैं।