शहर की बला गांव पर
देवेंद्र शर्मा Tuesday, November 03, 2009 03:50 [IST]  

townभोपाल. निशातपुरा स्थित ऑयल डिपो को राजधानी से 20 किलोमीटर दूर बकानिया-भौंरी में स्थापित करने की प्रस्तावित योजना से ही यहां के आसपास के आधा दर्जन गांव के करीब 30 हजार लोग सहम गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि शहर को हादसे से बचाने के लिए गांव की बलि चढ़ाने की कोशिश क्यों की जा रही है? दूसरी तरफ प्रशासन का कहना है कि फिलहाल कंपनियों को जमीन चयन के लिए कहा गया है। इसमें नियम और सुरक्षा मापंदड का पूरा ध्यान रखा जाएगा।

भोपाल-इंदौर बायपास से लगे इस क्षेत्र में पहले से ही दो ऑयल डिपो और एक गैस डिपो स्थापित है। इसके बाद निशातपुरा ऑयल डिपो को भी वहां ले जाने के प्रस्ताव से यहां के ग्रामीणों को सुरक्षा को लेकर चिंता होने लगी है। हाल ही में जयपुर में पेट्रोलियम कंपनियों में लगी भीषण आग के बाद यह दहशत और भी ज्यादा बढ़ गई है और ग्रामीणों ने अभी से ही इस प्रस्ताव का विरोध करना शुरू कर दिया है।

पेट्रोलियम टैंकरों की आवाजाही का है डर

भौंरी बकानिया व कोलूखेड़ी गांव की जमीन पर वर्तमान में भारत पेट्रोलियम व रिलायंस ऑयल डिपो के साथ इंडियन ऑयल का गैस डिपो है। इसके चलते पूरा क्षेत्र पेट्रोलियम टैंकरों की आवाजाही से होने वाली परेशानी और लाखों लीटर पेट्रोलियम पदार्थो के भंडारण से सहमा हुआ है। लोग यहां की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता में हैं।

बरखेड़ा सालम, भौंरी, बकानिया, कोलूखेड़ी जैसे कुछ गांव तो ऐसे हैं जो डिपो की सीमा से महज 500 मीटर से एक किलोमीटर के दायरे में आ रहे हैं। इससे यहां खतरा ज्यादा होने की आशंका व्यक्त की जा रही है। इनके साथ खजूरी सड़क, खतलाखेड़ी, जमुनिया जैसे गांव भी डिपो से दो किलोमीटर की सीमा में हैं। प्रति गांव ढाई हजार औसत आबादी के हिसाब से वर्तमान में ही 30 हजार से अधिक लोगों की आबादी डिपो से तीन किलोमीटर के दायरे में है। ऐसे में नई कॉलोनियों के विकास के बीच दो डिपो और आ जाने से क्षेत्र में खतरे का दायरा बढ़ जाएगा। इसी को लेकर यहां के रहवासी चिंता में हैं।

आवासीय क्षेत्र में कैसे दी मंजूरी

ऑयल एवं गैस के तीनों डिपो ने भोपाल इंदौर बायपास से लगे ग्रामीण क्षेत्र की सौ एकड़ से भी अधिक भूमि पर अपना फैलाव कर रखा है। भोपाल विकास योजना में इस क्षेत्र को आवासीय घोषित किए जाने के बाद यहां तेजी से कॉलोनियां विकसित की जा रही हैं। वर्तमान में यहां एक दर्जन से अधिक कॉलोनियों का विकास कार्य जारी है।

कुछ में सड़कें बन रही हैं तो कुछ ने सीमा दीवार के साथ मुख्यद्वार बना दिया है। इनमें से आधा दर्जन कॉलोनियां तो ऑयल एवं गैस डिपो से सटकर ही विकसित हो रही हैं। ऐसे में वर्तमान स्थित डिपो के साथ नए आने वाले डिपो पूरे क्षेत्र के लिए खतरे की घंटी के समान होंगे और इनमें कोई भी हादसा होने पर एक बड़ी आबादी प्रभावित हो सकती है।

अब तक पूरा नहीं किया सुरक्षा का वादा

इंडियन गैस डिपो संचालकों ने इस अंचल को अग्नि हादसे से सुरक्षा देने के लिए दस वर्ष पूर्व किया वादा अभी तक नहीं निभाया है। संचालकों ने भोपाल बायपास से लगे गांवों में पानी की बड़ी टंकी के साथ जनरेटर लगाने तथा एक कर्मचारी की नियुक्ति करने की बात कही थी। ग्रामीणों का कहना है कि वे अब तक इस वादे के पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं।

कृषि जमीन पर मंडराया खतरा

नए डिपो की स्थापना में जमीन की भी जरूरत पड़ेगी। 20 वर्ष पूर्व उक्त डिपो की स्थापना में अपनी 18 एकड़ जमीन गंवा चुके कालूखेड़ी के रमजान खान कहते हैं कि यदि इसी तरह हमारी जमीन लेते गए तो इस क्षेत्र में कृषि भूमि तो खत्म होगी ही हम भी बेकार हो जाएंगे। प्रशासन को हमारी बेरोजगारी पर भी ध्यान देना चाहिए।

रहवासी क्षेत्र में व्याप्त है ज्यादा खतरा

बताया जाता है कि इस ग्रामीण क्षेत्र में जमीन की कीमत करोड़ों में पहुंच चुकी है। हाल में यहां पांच एकड़ के भूखंड दो से ढाई करोड़ रुपए में बिके हैं। इन पर कॉलोनियां बनाई जा रही हैं। इस प्रकार यहां रहवासी क्षेत्र बढ़ने और डिपो को स्थापित करने के प्रस्ताव पर खतरे की आशंका है।

नियमों का ध्यान रखा जाएगा

अभी तो कंपनियों को जमीन चयन के लिए कहा गया है। राजस्व अधिकारियों के साथ नियम और सुरक्षा के मापदंडों को ध्यान में रखकर ही शिफ्टिंग की जाएगी।

शिवशेखर शुक्ला, कलेक्टर



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