भोपाल. पंडित विश्व मोहन भट्ट के शिष्य सतीश खानवलकर (इंदौर) ने मराठी उत्सव-2009 के तीसरे दिन मोहनवीणा की तान छेड़कर श्रोताओं को संगीत लहरियों पर झूमने पर मजबूर कर दिया।
मनमोहिनी ग्रुप द्वारा शब्देविन संवादू की प्रस्तुति के दौरान उन्होंने यह अभूतपूर्व प्रस्तुति दी। उनके साथ आए प्रशांत अग्निहोत्री (अकोला), रमेश शुक्ला (अकोला), संदीप कपूर (चंद्रपुर) सतीश फड़के (अकोला), राम कशेरा (इंदौर) और पंकज सिंह ने समां बांध दिया।
संगीतकार मदन मोहन को समर्पित संगीत सभा में उन्होंने एक से बढ़कर एक नगमे वाद्यों से प्रस्तुत किए, जिसका आगाज मराठी गीत ‘श्रावणात घनन्या बरसा’ से किया गया। इस संगीतमयी शाम में शंकर-जयकिशन, आरडी बर्मन, लक्ष्मीकांत प्यारेलाल द्वारा लयबद्ध किए गए गीतों को इंस्ट्रूमेंट्स के जरिए प्रस्तुत किया गया। मलेशिया, फ्रांस, लंदन आदि कई देशों में अपनी प्रस्तुति दे चुके ये कलाकार झीलों की नगरी में पहली बार अपनी प्रस्तुति देने पहुंचे थे।
इससे पूर्व तीसरे दिन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित सांसद कैलाश जोशी का गर्मजोशी से स्वागत किया गया। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि जो शख्स आगे बढ़ता चला जाए वह असली मायने में मराठा है। उन्होंने कहा कि मुझे गर्व है कि मैं इसी का हिस्सा हूं। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे दैनिक भास्कर के स्टेट एडिटर अभिलाष खांडेकर ने अपने उद्बोधन में कहा कि हर व्यक्ति में कुछ कमियां होती हैं और कुछ स्ट्रेंथ होते हैं। लोगों को इसका ख्याल रखते हुए अपने लक्ष्य की ओर बढ़ना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यह उत्सव निश्चित रूप से एक सुखद सौगात है। इसके अलावा उत्सव में विशिष्ट अतिथि के रूप में चिंतामण कांड, गणोश बागदरे, राजेश व्यास, डॉ. शफकत मोहम्मद खान, बीएस कुशवाह और राकेश मलिक उपस्थित थे। मराठी भाषी समन्वय परिषद के अध्यक्ष संजय पांडे ने सभी अतिथि गणों का स्वागत किया।