आग हादसे की जांच शुरू कमेटी जयपुर पहुंची
Bhaskar News Tuesday, November 03, 2009 04:07 [IST]  

जयपुर. इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के जयपुर डिपो में लगी आग के कारणों की केन्द्रीय कमेटी ने सोमवार को जांच शुरू कर दी। हिंदुस्तान पेट्रोलियम के पूर्व चेयरमैन एम.बी. लाल की अध्यक्षता में आई 6 सदस्यीय कमेटी ने घटनास्थल और आसपास की प्रभावित फैक्ट्रियों का दौरा किया। यह कमेटी दो माह में अपनी रिपोर्ट सरकार को देगी।



कमेटी के सदस्य और राज्य के खान एवं पेट्रोलियम विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. गोविंद शर्मा ने बताया कि कमेटी के सदस्यों ने डेढ़ घंटे तक मीटिंग करके जांच के बिंदु तय किए हैं। कमेटी को सरकार ने 60 दिन का समय दिया है।



कमेटी के अध्यक्ष एम.बी. लाल ने मीडिया को बताया कि टर्मिनल में आग लगने के दौरान मानवीय लापरवाही के बारे में बिना जांच किए फिलहाल कुछ नहीं कहा जा सकता। विस्तृत जांच के बाद ही कमेटी मानवीय लापरवाही अथवा आग लगने के कारणों के बारे में कुछ कह पाएगी। कमेटी ने सीतापुरा औद्योगिक क्षेत्र में आईओसी के टर्मिनल का अंदर से मौका मुआयना किया और कुछ सबूत जुटाए। बाद में कमेटी ने जीनस सहित कुछ अन्य फैक्ट्रियों में हुए नुकसान का भी जायजा लिया।



अब कमेटी क्या करेगी : कमेटी आसपास के लोगों से मिलेगी। घायलों और घटना के चश्मदीद गवाहों के बयान लेगी। डिपो के निकट फैक्ट्रियों में काम करने वालों व फैक्ट्री मालिकों से भी बात करेगी।



जांच कमेटी में हैं ये लोग : हिंदुस्तान पेट्रोलियम के पूर्व चेयरमैन एम.बी.लाल, राज्य के खान एवं पेट्रोलियम विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. गोविंद शर्मा, भारत सरकार में सलाहकार (रसायन) एस.के. हाजरा, मुख्य विस्फोटक नियंत्रक पी.बी. येडला, भारत पेट्रोकैमिकल्स लिमिटेड के बी.के. दत्ता और इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड के निदेशक एम. के. जोशी।



रिकॉर्ड कब्जे में लिया : आग की जांच करने आए दल ने टर्मिनल का रिकॉर्ड कब्जे में कर लिया है। सोमवार शाम 3.30 बजे दल टर्मिनल भवन पहुंचा व मौका मुआयना किया। वहां टैंक के अवशेष, जली हुई दो मोटरसाइकिलें तथा टूटी हुई दीवारें देखीं। इसके बाद ऑफिस में बचा हुआ रिकॉर्ड, ड्यूटी रजिस्टर, व अन्य कागजात अपने कब्जे में लिए।



ये होंगे जांच के बिंदु



तेल डिपो में तकनीकी खामी अथवा किसी व्यक्ति की लापरवाही से हादसा तो नहीं हुआ।

पेट्रोल के रिसाव के बाद अचानक आग किस वजह से लगी।

कंपनी में फायर फाइटिंग सिस्टम का उपयोग क्यों नहीं किया जा सका।

टैंकों में लगी आग से इतनी भारी मात्रा में कार्बन क्यों निकल रहा है?

तेल डिपो के आसपास आबादी को शिफ्ट किया जाए या डिपो को वहां से हटाया जाए।

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