उज्जैन. कार्तिक पूर्णिमा पर सोमवार को डेढ़ लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने शिप्रा में डुबकी लगाई। पहलीबार पूर्णिमा पर इतनी अधिक संख्या में लोग स्नान करने पहुंचे। घाटों पर सिंहस्थ सा नजारा दिख रहा था। शाम को पुण्य सलिला शिप्रा दीपकों की रोशनी से जगमगा उठी। रात 11 बजे तक दीप छोड़ गए।
सोमवार तड़के 4 बजे शिप्रा में पर्व स्नान शुरू हुआ। कार्तिक पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं ने पितृ शांति के लिए पिंडदान किए और मंदिरों में देव-दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया। शाम ६ बजे तक घाटों पर स्नान का सिलसिला चलता रहा। गोधूलि बेला में दीपदान का क्रम शुरू हुआ और रात 11 बजे तक महिलाओं ने दीप छोड़े।
कार्तिक मास में जो महिलाएं महीनेभर स्नान नहीं कर पाई थी उन्होंने पूर्णिमा पर स्नान कर पुण्य प्राप्त किया। ग्रामीण श्रद्धालुओं ने रामघाट पर पितरों के निमित्त तर्पण करवाया, पंडितों को दक्षिणा दी और मंदिरों में दर्शनकर गायों को चारा खिलाया। सोमवार को मालवांचल सहित देशभर के श्रद्धालु कार्तिक पूर्णिमा का स्नान करने यहां पहुंचे। दिनभर शिप्रा के घाट श्रद्धालुओं की भीड़ से पटे रहे।
दीपों से जगमगा उठा दत्तअखाड़ा घाट: कार्तिक पूर्णिमा की शाम दत्तअखाड़ा घाट दीपकों की रोशनी से जगमगा उठा। इंदौर के गिरिराज मंडल द्वारा यहां ११ हजार दीपक लगाए एवं भजन संध्या आयोजित की। गोविंदभाई के नेतृत्व में कलाकारों ने धार्मिक भजनों की प्रस्तुति दी। देररात को घाट पर आतिशबाजी हुई। इस मौके पर अखाड़े में भंडारा भी हुआ।
महाकाल में 50 हजार : कार्तिक पूर्णिमा पर महाकाल मंदिर में ५क् हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। सर्वाधिक भीड़ ग्रामीणों की थी। गर्भगृह में सुबह से प्रवेश बंद रहा। भक्तों ने नंदीहॉल से बाबा के दर्शन किए। मंदिर प्रशासन ने
भीड़ को देखते हुए बेरिकेड्स से होकर प्रवेश व जूना महाकाल वाले गेट से निर्गम व्यवस्था की थी। पुलिस चौकी के मुताबिक दिनभर में ५क् हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने महाकाल दर्शन किए।
शिप्रा स्नान के नजारे
रामघाट से छोटे पुल तक मार्ग के दोनों ओर भिखारियों का कब्जा था, जो पुलिस की हिदायत के बाद भी नहीं हटे। ठ्ठ नदी के बीच लगे ५ में से २ फव्वारे दिनभर बंद रहे।
रविदासघाट के आगे की फर्शियां उखड़ी होने से श्रद्धालु गिरकर घायल हुए। ठ्ठ घाट पर दो दर्जन से अधिक पंडों के पूजन के लिए तख्त लगे थे। ठ्ठ खोया-पाया केंद्र नहीं होने से श्रद्धालुओं को परेशानी हुई। ठ्ठ घाटों पर लोगों द्वारा छोड़े गए कपड़े व चप्पलों का ढेर लग गया था। फिसलन होने से कई श्रद्धालु घाटों पर फिसलकर पानी में गिरे। ठ्ठ शाम को दीपदान के समय रामघाट पर एक महिला पानी में डूबने से बची।