बिलासपुर. जिला अस्पताल के ज्यादातर डाक्टरों की ड्यूटी करने में रुचि नहीं है। आलम यह है कि 32 डाक्टरों की टीम होने के बावजूद यहां इलाज के लिए दूसरी जगहों से डाक्टरों को बुलाया जा रहा है। अधिकतर डाक्टर अस्पताल देर से आते हैं और समय के पहले ही निकल भी जाते हैं।
अस्पताल प्रबंधन अब ऐसे डाक्टरों की ड्यूटी चेक करने के लिए अस्पताल में अटेंडेंस मशीन लगाने की तैयारी कर रहा है। इसमें डाक्टर ही नहीं, यहां के कर्मचारी भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे। जिला अस्पताल में चिकित्सा व्यवस्था दिन ब दिन बदतर होती जा रही है। यहां के मरीजों को हमेशा डाक्टरों के अस्पताल नहीं आने की शिकायत रहती है।
यहां 32 डाक्टरों की टीम है, लेकिन ज्यादातर डाक्टर नदारद रहते हैं। कई बार तो इलाज के लिए नेत्र चिकित्सालय सरकंडा से डाक्टर बुलाने पड़ते हैं। यहां डाक्टरों का ड्यूटी टाइम सुबह 8 से दोपहर 1 बजे व शाम 5 से 6 है, पर डाक्टर सुबह 10 बजे से पहले नहीं आते।
दोपहर 12 बजे के बाद वे अपने विभाग में भी नहीं मिलते। शाम को तो कई डाक्टर ड्यूटी में आते ही नहीं है। बताया जा रहा है कि यहां के कई डाक्टरों के शहर में निजी क्लीनिक है। डाक्टर अस्पताल में कम, अपने क्लीनिक पर ज्यादा ध्यान देते हैं। मरीजों को यहां डाक्टर की तलाश अक्सर भटकते देखा जा सकता है।
थोक में किया जाता है मरीजों को रिफर: जिला अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती होने वाले ज्यादातर मरीजों को सिम्स रिफर कर दिया जाता है। अगर पिछले 10 दिनों का आंकड़ा दिखे तो यहां से करीब 50 मरीजों को सिम्स रिफर किया गया है। इधर सिम्स के डाक्टरों का कहना है कि गंभीर मरीजों को सिम्स रिफर करना जायज है, लेकिन ऐसी सामान्य बीमारियों के मरीजों को भी सिम्स भेज दिया जाता है, जिनका इलाज जिला अस्पताल में ही किया जा सकता है। जिला अस्पताल के आपात वार्ड में इलाज के लिए भर्ती होने वाले मरीजों से यहां की नर्सो द्वारा र्दुव्यवहार करने की शिकायत भी आम है।
अस्पताल के सामने क्लीनिक: जिला अस्पताल के ठीक सामने राजीव प्लाजा में यहां के कई डाक्टरों की क्लीनिक हैं। बिलासपुर डायग्नोस्टिक सेंटर पीके श्रीवास्तव, संकल्प नेत्रालय के संचालक डा. संदीप तिवारी, सीएस उइके, निर्मला सोनोग्राफी के संचालक डा. सुरेश तिवारी आदि डाक्टर जिला अस्पताल में कार्यरत हैं। इसी तरह स्नायु व मानसिक रोग विशेषज्ञ डा. आशुतोष तिवारी की भी क्लीनिक है।